करैरा(शिवपुरी)-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विद्या भारती अखिल भारती शिक्षा संस्थान नई दिल्ली के मार्ग दर्शन में विद्या भारती मध्यभारत प्रान्त द्वारा सप्तशक्ति संगम का विराट आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन भारतीय नारी की अन्र्तनिहित शक्ति के जागरण परिवार व समाज के सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगा।
सरस्वती शिशु मन्दिर करैरा जिला शिवपुरी द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में सप्तशक्ति संगम करैरा की संयोजिका श्रीमती अर्चना दुबे ने बताया कि विद्या भारती आज देश का सबसे बडा अशासकीय शैक्षिक संगठन है। वर्तमान में देशभर में 21 हजार से अधिक विद्यालय संचालित है। जहाँ विद्या संस्कार और राष्ट्र भावना पर आधारित शिक्षा प्रदान
की जाती है। इस अभियान के अन्तर्गत पूरे भारत में 30 हजार से अधिक मातृ गोष्ठियों का आयोजन किया जावेगा। मध्यभारत प्रान्त में इस कार्यक्रम के अर्न्तगत 6 हजार से अधिक मातृ गोष्ठियां आयोजित की जा रहीं है। जिसमें 10 लाख से अधिक माताओं के प्रबोधन का संकल्प लिया गया है।
सरस्वती शिशु मन्दिर करैरा द्वारा भी 30 गोष्ठियों का आयोजन विभिन्न वार्ड / ग्राम में किया जावेगा। दिनांक 09/11/2025 को सरस्वती शिशु मन्दिर करैरा में बृहद मातृ गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान न केवल समाज में नारी की भूमिका को सशक्त बनायेगा बल्कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में मातृ शक्ति की भागीदारी को भी सुदृढ़ करेगा।
“सप्तशक्ति संगम” नारी शक्ति के जागरण का राष्ट्र अभियान –
सप्तशक्ति संगम महिलाओं की महिलाओं के लिये और महिलाओं के माध्यम से संचालित एक अखिल भारतीय अभियान है।इनके नाम श्रीमद्भागवत गीता के प्रसिद्ध श्लोक “कीर्तिः श्रीर्वाक् च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमाः” से प्रेरित है. जो नारी की सात दैवीय शक्तियों कीर्ति, श्री. याकू, स्मृति, मेघा, धृति और क्षमा का प्रतीक है।
इन सात दैवीय शक्तियों के संगम से सप्तशक्ति संगम का भाव प्रकट होता है, जिसका उद्देश्य नारी के भीतर विद्यमान आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक सामर्थ्य का पुनर्जागरण कर एक सशक्त संस्कारी और समृद्ध भारत का निर्माण करना है।
यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह भारतीय जीवन मूल्यों के पुनर्स्थापन की दिशा की एक वैचारिक क्रांति है। मातृगोष्ठियों के माध्यम से कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण हितैषी जीवनशैली भारतीय दृष्टि से आधुनिकता का संतुलन तथा राष्ट्र के विकास में महिलाओं की सहभागिता एवं उत्तरदायित्व बोध को सशक्त करने का यह प्रयास है।
सप्तशक्ति संगम के अंतर्गत सहभागी प्रत्येक नारी पंच परिवर्तन के रूप में निम्न पाँच जीवन संकल्प को अपनाएगी-
1. सामाजिक समरसता समाज में जाति वर्ग और मेदभाव से ऊपर उठकर एकता और सहयोग की भावना को
सशक्त बनाना।
2. पर्यावरण संरक्षण प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाकर पर्यावरण-संतुलित जीवनशैली अपनाना।
3. कुटंब प्रबोधन परिवार को संस्कार, संवाद और स्नेह का केन्द्र बनाना।
4. स्वदेशी देशज, उत्पादों, कुटीर उद्योगों और आत्मनिर्भर भारत की भावना को प्रोत्साहन देना।
5. नागरिक शिष्टाचार समाज में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादित आचरण को जीवन का अंग बनाना।
इन पंच संकल्पों के माध्यम से नारी समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा बनेगी और सप्तशक्ति संगम परिवार से राष्ट्र तक एक समरस सशक्त और सजग समाज के निर्माण का माध्यम बनेगी।
राष्ट्र निर्माण में नारी की निर्णायक भूमिका
प्रेस वार्ता के अंत में श्रीमती अर्चना दुबे ने कहा भारत माता के उत्थान में मातृशक्ति की भूमिका अनिवार्य है। जब नारी जागृत होती है तो पूरा समाज जागृत होता है। सप्तशक्ति संगम के माध्यम से हर माता अपने परिवार से प्रारम्भ होकर राष्ट्र तक, परिवर्तन की प्रेरणा बनेगी।
इस अभियान के माध्यम से विद्या भारती का उद्देश्य प्रत्येक परिवार को एक संस्कार केन्द्र के रूप में विकसित करना और मातृशक्ति के माध्यम से नव भारत के निर्माण की दिशा में ठोस कदम बढ़ाना है।
प्रेस वार्ता में श्रीमती अर्चना दुबे के अतिरिक्त विद्यालय संचालन समिति की उपाध्यक्ष डॉ. श्वेता शर्मा, प्राचार्य उमाशंकर भार्गव सह संयोजिका श्रीमती सीमा बंसल एवं कार्यक्रम प्रभारी संग्राम सिंह पाल की गरिमामयी उपस्थिति रहीं।
