भोपाल- मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल द्वारा रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल प्रक्रिया में किए गए हालिया बदलावों के बाद पूरे प्रदेश के फार्मासिस्टों में गहरा आक्रोश फैल गया है। वरिष्ठ फार्मासिस्टों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नए नियम उम्रवाद (Age Discrimination), अनावश्यक कागजी बोझ, और सरकारी नीतियों के विपरीत प्रशासनिक जटिलता का उदाहरण हैं।
जिसका प्रदेशभर में तीखा विरोध है।
65+ आयु वालों के लिए मेडिकल फिटनेस, मूल-निवासी प्रमाण, और जटिल रिन्यूअल से हाहाकार — “Ease of Doing की जगह Ease of Troubling!”
65 वर्ष से अधिक फार्मासिस्टों पर मेडिकल फिटनेस का बोझ—दूरी, समय और खर्च तीनों बढ़े,
काउंसिल ने कहा है कि 65 वर्ष से अधिक आयु वाले फार्मासिस्टों को मेडिकल बोर्ड से फिटनेस सर्टिफिकेट लाना अनिवार्य होगा, वरना रिन्यूअल नहीं होगा।
लेकिन ज़मीनी हकीकत में प्रदेश के ज्यादातर जिलों की सीमाएँ 100–100 किलोमीटर तक फैली हैं।
ऐसे में दूर-दराज़ के गाँवों, कस्बों और तहसीलों से आने वाले वरिष्ठ फार्मासिस्टों को जिला मुख्यालय पहुँचने में अत्यधिक परेशानी होगी।
वरिष्ठ फार्मासिस्टों का कहना है:
“उम्र बढ़ने का मतलब अयोग्य होना नहीं। अनुभव को अपमानित करने वाला नियम है।”
जिला मेडिकल बोर्ड हफ्ते में सिर्फ एक दिन—रिन्यूअल डेट निकलने और भारी फाइन का खतरा
अधिकांश जिलों में मेडिकल बोर्ड सप्ताह में केवल एक दिन बैठता है।
ऐसे में सैकड़ों वरिष्ठ फार्मासिस्ट समय पर प्रमाणपत्र नहीं बनवा पाएंगे, जिससे उनके रिन्यूअल की अंतिम तिथि निकल जाएगी और भारी फाइन (जुर्माना) देना पड़ेगा।
फार्मासिस्टों का आरोप:
“सरकार कहती है बोझ घटाओ, काउंसिल हर कदम पर बोझ बढ़ा रही है।”
पहले से रजिस्टर्ड फार्मासिस्टों से ‘मूल-निवासी प्रमाण-पत्र’ की माँग—सबसे बड़ा सवाल
फार्मासिस्टों के बीच सबसे बड़ी नाराज़गी इस बात को लेकर है कि काउंसिल रिन्यूअल के समय मध्यप्रदेश के मूल निवासी का प्रमाण-पत्र मांग रही है।
जबकि रजिस्ट्रेशन के समय—
पहचान प्रमाण,निवासी दस्तावेज़,शैक्षणिक योग्यता पहले ही जमा किए जा चुके हैं।
फार्मासिस्टों का सवाल बेहद तीखा है:
“जो व्यक्ति 20–30 साल से MP में फार्मेसी चला रहा है, उसे दूसरी बार निवास क्यों सिद्ध करना पड़े? क्या काउंसिल को अपने ही रजिस्टर्ड सदस्यों पर अब भरोसा नहीं?”
Ease of Doing का प्रचार और काउंसिल के कठोर नियम—स्पष्ट विरोधाभास
CM मोहन यादव कई बार Ease of Doing, Single Window System, और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की बात कर चुके हैं।
लेकिन MP Pharmacy Council लगातार ऐसी शर्तें जोड़ रही है जो प्रक्रिया को और जटिल, खर्चीली और समय-नाशक बनाती हैं।
फार्मासिस्टों का तीखा आरोप:
“सरकार कहती है सरलता; काउंसिल देती है कठिनाई। यह ‘Ease of Doing’ नहीं, ‘Ease of Troubling’ है।”
अनुभवी फार्मासिस्टों की चेतावनी—नियम वापस नहीं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन तय
प्रदेशभर के फार्मासिस्टों ने संकेत दिया है कि यदि ये नियम तुरंत वापस नहीं लिए गए तो होगा सामूहिक ज्ञापन,
जिला स्तर पर विरोध,
और प्रांतीय आंदोलन
की तैयारी शुरू कर दी जाएगी।
वरिष्ठ फार्मासिस्टों का साफ कहना है—
“अनुभव को अपमानित करने वाले नियम स्वीकार नहीं। अनावश्यक कागजात और मेडिकल सर्टिफिकेट की बाध्यता तुरंत रद्द हो!”
इंदौर केमिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष विनय बाकलीवाल का कहना है इस संबंध में सरकार से हमारी बात चल रही है, शीघ्र ही हमारा संगठन कोई उचित निर्णय लेगा
