शिवपुरी, 8 अप्रैल।
पोषण ट्रैकर ऐप के विरोध में देशभर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले जारी आंदोलन के तहत शिवपुरी जिले में 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ ऑनलाइन कार्य बहिष्कार बुधवार को आठवें दिन भी जारी रहा।
संघ की जिला अध्यक्ष श्रीमती साधना पाठक ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पिछले लगभग 50 वर्षों से सेवाएं दे रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल सका है। सरकार उन्हें “स्कीम वर्कर” मानती है, जबकि उनसे तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के समान कार्य लिया जाता है। समान योग्यता के बावजूद उन्हें मात्र 4500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो अत्यंत कम है।
उन्होंने कहा कि पोषण ट्रैकर ऐप पर कार्य करना अत्यधिक जटिल और समयसाध्य है। टीएचआर वितरण के दौरान गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की फोटो, मोबाइल नंबर और ओटीपी सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं अपनानी पड़ती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या, हितग्राहियों के पास स्मार्टफोन का अभाव और ओटीपी साझा करने में अनिच्छा के कारण कार्यकर्ताओं को कई बार असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
इस बीच, केंद्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है। प्रतिनिधि मंडल केंद्रीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ ने 7 अप्रैल 2026 को महिला एवं बाल विकास केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी से मुलाकात कर पोषण ट्रैकर ऐप में आ रही समस्याओं से अवगत कराया और समाधान की मांग की।
कार्यकर्ताओं ने बढ़ते कार्यभार पर भी नाराजगी जताई है। 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों की आभा आईडी, 3 से 6 वर्ष के बच्चों की अपार आईडी, गर्भवती महिलाओं की ई-केवाईसी, नियमित गृह भ्रमण, बच्चों का वजन, कुपोषित बच्चों को एनआरसी रेफर करना तथा शाला पूर्व शिक्षा जैसे अनेक दायित्व निभाने पड़ते हैं। इसके अलावा “संपर्क ऐप” और “पोषण ट्रैकर ऐप” दोनों पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है, साथ ही 14 रजिस्टरों का संधारण भी करना होता है।
संघ का आरोप है कि सरकार द्वारा कोई डिजिटल उपकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे कार्यकर्ता अपने निजी मोबाइल का उपयोग करने को विवश हैं। लगातार तकनीकी दिक्कतों और बढ़ते कार्यभार के कारण कार्यकर्ता मानसिक दबाव में हैं।
संघ के अनुसार, पोषण ट्रैकर ऐप को सरल बनाने एवं अन्य मांगों को लेकर कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी के चलते केंद्रीय एवं राज्य पदाधिकारियों के निर्देशन में ऑनलाइन कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि उनका मानदेय कम से कम दोगुना किया जाए और उन्हें नियमित शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो देशभर की कार्यकर्ता दिल्ली में व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगी।
