शिवपुरी। सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय, फतेहपुर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) के उद्घाटन सत्र में मध्यभारत प्रांत के प्रांत प्रचारक विमल गुप्ता ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में कार्य विस्तार एवं कार्य के दृढ़ीकरण के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करना सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि एक ऐसी साधना स्थली है जहाँ शिक्षार्थी साधक के रूप में शारीरिक, बौद्धिक एवं व्यवस्थात्मक प्रशिक्षण प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि इन सभी प्रकार के प्रशिक्षण का आधार मन की साधना है। गीता के छठे अध्याय के 35वें श्लोक का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अभ्यास और वैराग्य के माध्यम से मन को नियंत्रित किया जा सकता है।
विमल गुप्ता ने वर्ग के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से समूह में कार्य करने की क्षमता, संघ के वैचारिक अधिष्ठान की स्पष्ट समझ तथा साहसी और अनुशासित स्वयंसेवकों का निर्माण किया जाता है। वर्ग की 24 घंटे की अनुशासित एवं व्यस्त दिनचर्या के बीच शिक्षार्थी सीखने की भावना के साथ स्वयं को निरंतर विकसित करता है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग में शिक्षार्थी समय प्रबंधन, मानव प्रबंधन, वित्तीय प्रबंधन, संसाधन प्रबंधन, संकट प्रबंधन तथा कार्यक्रम प्रबंधन जैसे विभिन्न विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त करते हैं। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि शताब्दी वर्ष में अधिक समय देकर संघ कार्य को व्यापक और स्थायी बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
जानकारी के अनुसार मध्यभारत प्रांत के आठ विभागों और 31 जिलों से कुल 369 शिक्षार्थी प्रशिक्षण प्राप्त करने पहुँचे हैं। इनके प्रशिक्षण के लिए 42 शिक्षक एवं संचालन टोली के 13 सदस्य पूर्णकालिक रूप से कार्यरत हैं। वहीं वर्ग की व्यवस्थाओं के संचालन हेतु 35 विभिन्न कार्य विभागों में प्रबंधक जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
यह वर्ग संगठनात्मक क्षमता, अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक दायित्वों के निर्माण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
