शिवपुरी- सोशल मीडिया पर लाखों लोगों की जुबान पर चढ़ीं कविता की पंक्तियां, साहित्यकार ज्ञान प्रकाश आकुल ने कहा- नई पीढ़ी की काव्य समझ पर सवाल उठाने वालों को मिला जवाब।
वर्षों की साहित्यिक साधना, संवेदनाओं की गहराई और शब्दों की विलक्षण अभिव्यक्ति जब जनमानस से जुड़ती है, तो रचना केवल कविता नहीं रहती, बल्कि लोगों की आवाज बन जाती है। कवि प्रतीक चौहान की रचना ‘स्वप्न स्वाहा हुए तो हवन हो गया’ इन दिनों कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर इस रचना की पंक्तियां तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। देश-दुनिया में हजारों लोग इस पर अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं।
इस रचना की लोकप्रियता पर साहित्यकार ज्ञान प्रकाश आकुल ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कविता में भाषा का सौंदर्य, लय और धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से रूपकों की सहज अभिव्यक्ति अद्भुत है। यह लोकप्रियता उन लोगों के लिए भी एक जवाब है, जो नई पीढ़ी की कविता की समझ पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेन-जी की नई पीढ़ी भी इन पंक्तियों को आत्मसात कर रही है और उन पर रील बना रही है, यह साहित्य के लिए सुखद संकेत है।
उन्होंने कवि प्रतीक चौहान की रचनात्मक यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि वे पिछले पांच-छह वर्षों से उनकी कविताओं के प्रशंसक रहे हैं, लेकिन यह रचना उनके कविता-सफर के एक नए और उजले अध्याय का शुभारंभ है। किसी कवि के लिए सबसे बड़ा सुख तब होता है, जब उसकी रचना जनगीत बनकर जन-जन की जुबान पर आ जाए।
दरअसल, ‘स्वप्न स्वाहा हुए तो हवन हो गया’ का लोकप्रिय होना केवल सोशल मीडिया पर किसी रचना का वायरल होना नहीं है, बल्कि यह उस साहित्यिक तपस्या की सार्थक परिणति है, जो वर्षों तक शब्दों और संवेदनाओं के बीच आकार लेती रही।
कवि प्रतीक चौहान की यह उपलब्धि बताती है कि अच्छी कविता को लोकप्रिय होने के लिए किसी प्रचार की नहीं, बल्कि दिल तक पहुंचने वाली अभिव्यक्ति की जरूरत होती है।
