करैरा (शिवपुरी)-24 अक्टूबर। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा स्थित श्री बाबा का बाग बगीचा धाम एवं श्रीराम राजा सरकार के परिसर में शनिवार से बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई थीं। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन कथा के पहले दिन श्रोताओं की संख्या अपेक्षा से काफी कम रही। शाम छह बजे तक भी कथा पंडाल का आधे से अधिक हिस्सा खाली नजर आया। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की तुलना में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी अधिक दिखाई दी।
दोपहर से शाम तक भी नहीं भर सका पंडाल
आयोजकों की ओर से कथा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन पहले दिन उम्मीद के अनुरूप भीड़ नहीं पहुंची। स्थानीय स्तर पर हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की चर्चा के बीच मौके पर सैकड़ों की संख्या में ही श्रोता नजर आए। कथा वाचक पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के निर्धारित समय से करीब दो घंटे विलंब से पहुंचने की बात भी सामने आई। इसके बावजूद शाम छह बजे तक पंडाल का बड़ा हिस्सा खाली रहा।
आखिर क्यों कम रही श्रद्धालुओं की संख्या?
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री देश-विदेश में अपनी विशिष्ट शैली और धार्मिक प्रवचनों के लिए चर्चित हैं। उनकी कथाओं में सामान्यतः बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में करैरा में पहले दिन अपेक्षाकृत कम भीड़ रहना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
श्रद्धालुओं की कम उपस्थिति के पीछे क्या कारण रहे, इसे लेकर अलग-अलग संभावनाएं जताई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कथा के दौरान मूल रामकथा के साथ हास्य-विनोद और अन्य प्रसंगों की अधिकता कुछ श्रोताओं की रुचि को प्रभावित कर सकती है। वहीं, यह भी संभावना जताई जा रही है कि करैरा में पहले कथा सुन चुके कुछ श्रद्धालुओं ने इस बार आयोजन में शामिल होने में विशेष रुचि नहीं दिखाई हो।
हालांकि, इन संभावनाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पहले दिन कम भीड़ के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।
पहले दिन की उपस्थिति ने खड़े किए सवाल
करैरा में आयोजित इस धार्मिक आयोजन के पहले दिन की तस्वीर ने आयोजकों की तैयारियों और श्रद्धालुओं की वास्तविक उपस्थिति के बीच अंतर को उजागर किया है। हालांकि, किसी बड़े धार्मिक आयोजन की सफलता का आकलन केवल पहले दिन की भीड़ से करना उचित नहीं होगा। आगामी दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है या नहीं, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।
अब सवाल यह है कि क्या आगामी दिनों में श्रीराम कथा के प्रति श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ेगा या पहले दिन की कम उपस्थिति आयोजन के लिए एक चुनौती बनी रहेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में ही मिल सकेगा।
नोट: श्रद्धालुओं की संख्या, कथा प्रारंभ होने के समय और कम उपस्थिति के कारणों से संबंधित तथ्यों की आयोजकों एवं प्रत्यक्षदर्शियों से पुष्टि कर लेना उचित होगा।
