उमरिया। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद शहडोल मेडिकल कॉलेज रेफर की गई ग्राम तामन्नारा निवासी प्रसूता मौसम बाई बैगा की रास्ते में मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। देर होने के कारण शव को रात में अंतिम संस्कार के लिए नहीं ले जाया जा सका। अगले दिन गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां चल ही रही थीं कि एक महिला के कथित तौर पर अजीब व्यवहार करने और प्रसूता की मौत को लेकर आपत्तिजनक दावे करने से गांव में हड़कंप मच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसी दौरान गांव की श्याम बाई बैगा वहां पहुंची और कथित तौर पर झूमते हुए खुद को ‘गीता’ बताते हुए प्रसूता और उसके बच्चे की मौत के संबंध में विचित्र दावे करने लगी। महिला द्वारा कथित रूप से यह कहे जाने के बाद कि उसने अपना बदला ले लिया है और वह बच्चे को खा गई है, ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
देखते ही देखते ग्रामीणों ने महिला पर जादू-टोना करने का संदेह जताते हुए उसे पास के एक पेड़ से बांध दिया। महिला को बंधक बनाए जाने की सूचना मिलते ही गांव में तनाव की स्थिति बन गई। किसी ग्रामीण ने इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी।
सूचना मिलते ही पुलिस बल के साथ पहुंचे डिप्टी कलेक्टर
मामले की सूचना मिलने पर डिप्टी कलेक्टर प्रत्यूष श्रीवास्तव पुलिस बल के साथ तत्काल ग्राम तामन्नारा पहुंचे। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर महिला को ग्रामीणों के कब्जे से मुक्त कराया और सुरक्षा की दृष्टि से उसे कोतवाली भेज दिया।
डिप्टी कलेक्टर ने स्थिति को नियंत्रित करने के बाद मृत प्रसूता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी प्रशासन की मौजूदगी में पूरी कराई, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
डिप्टी कलेक्टर प्रत्यूष श्रीवास्तव ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे सूचना मिली थी कि ग्राम तामन्नारा में कुछ लोगों ने एक महिला को बंधक बना लिया है और उसे छोड़ नहीं रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस की सहायता से मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। उन्होंने बताया कि कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। महिला को सुरक्षा की दृष्टि से कोतवाली भेजा गया है। विवाद किस कारण से उत्पन्न हुआ, इसकी जांच की जा रही है।
ग्रामीण ने बताई घटनाक्रम की पूरी कहानी
ग्राम तामन्नारा निवासी चुन्नू बैगा के अनुसार, प्रसूता की मौत के बाद अगले दिन अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान श्याम बाई बैगा वहां पहुंची और महिलाओं को वहां से हटाकर अंदर बैठ गई। ग्रामीण के मुताबिक महिला ने खुद को गीता बाई बताते हुए प्रसूता की मौत को लेकर विचित्र बातें कहीं और कहा कि उस पर ‘बरुआ चढ़ आया’ है। इसके बाद गांव में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया तथा अंतिम संस्कार की प्रक्रिया रोक दी गई।
अंधविश्वास के सामने फिर बेबस दिखा ग्रामीण समाज
घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास की गहरी जड़ों को उजागर कर दिया है। एक ओर प्रशासन और सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा एवं जागरूकता बढ़ाने के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसी व्यक्ति की मौत जैसी संवेदनशील घटना के बाद तर्क और चिकित्सा विज्ञान के बजाय जादू-टोने के संदेह में एक महिला को बंधक बना लिया जाना गंभीर चिंता का विषय है।
फिलहाल प्रशासन ने महिला को सुरक्षित कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महिला के कथित दावों के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और ग्रामीणों द्वारा उसके साथ की गई कार्रवाई के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
