वाराणसी। भारतीय भाषाओं की विविधता और उनमें निहित सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम रविवार को काशी में देखने को मिला। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में हिन्दुस्थान समाचार की ओर से आयोजित भारतीय भाषा समागम-2026 में देशभर से विभिन्न भारतीय भाषाओं के लिए कार्य कर रहे विद्वानों, शिक्षकों, साहित्यकारों और भाषा प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर हिन्दुस्थान समाचार के मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान एवं गुजरात के क्षेत्रीय संपादक डॉ. मयंक चतुर्वेदी को हिंदी भाषा के लिए सम्मानित किया गया। देश की भाषाई विविधता और भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन तथा उनके बीच संवाद की भावना को समर्पित इस आयोजन में सम्मान प्राप्त करने वाले 19 भाषाई विद्वानों में डॉ. चतुर्वेदी भी शामिल रहे। डॉ. चतुर्वेदी के लिए यह अवसर भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा से जुड़े विद्वानों के साथ एक मंच साझा करने का विशेष क्षण रहा।
समागम में संस्कृत, हिंदी, नेपाली, तमिल, भोजपुरी, गुजराती, मराठी, उर्दू, बंगाली, सिंधी, भोटी, पंजाबी, असमिया, उड़िया, कन्नड़, तेलुगु और पाली सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं की विद्वत परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधियों का अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के वेदवेदांग संकाय के संकाय प्रमुख एवं विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार तिवारी को संस्कृत, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. विद्योतमा मिश्रा को हिंदी, बीएचयू के भारतीय भाषा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमित थापा को नेपाली तथा इसी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जगदीशन टी को तमिल भाषा के लिए सम्मानित किया गया। श्रीबलदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़ागांव, वाराणसी के अध्यापक प्रकाश उदय को भोजपुरी तथा गुजरात साहित्य अकादमी, गांधीनगर के महासचिव डॉ. जयेन्द्रसिंह जादव को गुजराती भाषा के लिए सम्मान मिला।
श्रीकांची शंकराचार्य मठ, हनुमान घाट, वाराणसी के प्रबंधक एवं प्रतिनिधि बी.एस.एस. सुब्रह्मणयम को ‘भारतीय भाषा सेतु सम्मान’ से सम्मानित किया गया। भारतीय भाषा केंद्र, उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय, वाराणसी से जुड़ीं पद्मश्री पुराणिक को मराठी तथा बीएचयू के उर्दू विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद कासिम अंसारी को उर्दू भाषा के लिए सम्मानित किया गया। बीएचयू के बंगाली विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुबीर घोष को बंगाली तथा संस्कृत पीजी कॉलेज, फिरोजाबाद की सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. तुलसी देवी को सिंधी भाषा के लिए सम्मान मिला।
केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ के कुलपति भिक्षु प्रो. (डॉ.) वंगयुग दोर्जे नेगी को भोटी, पंजाब के फरीदकोट स्थित मोरनवाली के शिक्षक डॉ. देवेन्दर सैफी को पंजाबी भाषा के लिए सम्मानित किया गया। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के सेवानिवृत्त आचार्य प्रो. कृष्णकान्त शर्मा को असमिया, बीएचयू के व्याकरण विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर प्रियव्रत मिश्रा को उड़िया, काशी तीर्थ पुरोहित (कर्नाटक) बी. सुरेश को कन्नड़, काशी तेलुगु समिति के सचिव वी.वी. सुंदर शास्त्री को तेलुगु तथा डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह को पाली भाषा के लिए सम्मानित किया गया।
भारतीय भाषा समागम का मूल भाव भारतीय भाषाओं को केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और एकता की महत्वपूर्ण आधारशिला के रूप में देखने का रहा। अलग-अलग भाषाओं की विद्वत परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधियों का एक मंच पर सम्मान इस बात का प्रतीक बना कि भाषाई विविधता भारत की सांस्कृतिक शक्ति है।
काशी में आयोजित यह समागम भारतीय भाषाओं के बीच संवाद, परस्पर सम्मान और समन्वय की उस परंपरा को भी रेखांकित करता है, जिसकी जड़ें भारतीय सभ्यता के लंबे सांस्कृतिक इतिहास में दिखाई देती हैं। डॉ. मयंक चतुर्वेदी का हिंदी भाषा के लिए सम्मानित होना इसी व्यापक भारतीय भाषाई परंपरा के बीच हिंदी की भूमिका को रेखांकित करने वाला अवसर रहा।
