बाबरी मस्जिद निर्माण से जुड़े इस ट्रस्ट के कैशियर मोइनुल हक उर्फ राना ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए हुमायूं कबीर पर चंदे की रकम के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। उनके इस्तीफे के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा में आ गया है।
बांग्ला मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोइनुल हक राना ने दावा किया कि हुमायूं कबीर द्वारा चेक साइन कर लगातार पैसे निकाले जा रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि चंदे की राशि का उपयोग कहां किया गया, इसका कोई स्पष्ट हिसाब उपलब्ध नहीं है। राणा के मुताबिक, कैशियर होने के बावजूद जब उन्होंने खर्च का विवरण मांगा, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
मोइनुल हक ने यह भी आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद निर्माण के नाम पर एकत्र किया गया चंदा हुमायूं कबीर और उनके बेटे के पास गया। उनका कहना है कि चेक पर उनके हस्ताक्षर होने चाहिए थे, लेकिन फंड के उपयोग का कोई पारदर्शी लेखा-जोखा सामने नहीं आया। कुछ रिपोर्ट्स में QR कोड के जरिए फंड से जुड़े अनियमित लेनदेन के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।
इस पूरे विवाद के बीच राजनीतिक असर भी देखने को मिल रहा है। जिस विधानसभा क्षेत्र में मस्जिद निर्माण का कार्य चल रहा है, उसे हुमायूं कबीर का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है। अब आरोप सामने आने के बाद उनकी पार्टी AJUP को लेकर भी राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं।
उधर, कैशियर मोइनुल हक राणा ने कहा कि वे अब इस संगठन से जुड़े नहीं रह सकते क्योंकि उनके अनुसार जिस सेवा भाव से उन्होंने काम शुरू किया था, वह अब सवालों के घेरे में आ गया है।
इससे पहले एक कथित स्टिंग वीडियो भी सामने आया था, जिसमें हुमायूं कबीर पर बीजेपी नेताओं के साथ 1000 करोड़ रुपये की डील पर चर्चा करने के आरोप लगे थे। हालांकि, हुमायूं कबीर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे एआई जनरेटेड वीडियो बताया है और इसे फैलाने वालों पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है।
