नई व्यवस्था के अनुसार ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक सभी बाहरी कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। यह समय दिन का सबसे अधिक गर्म हिस्सा माना जाता है, जब लू लगने और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याओं का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके अलावा कामकाजी समय में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब श्रमिक सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 4 बजे से 8 बजे तक ही काम कर सकेंगे। इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में न आएं और सुरक्षित वातावरण में अपना काम पूरा कर सकें।
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों, बाजारों और ठेला वेंडिंग जोन में इन नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। स्थानीय प्रशासन को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो सके। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल एक अस्थायी व्यवस्था नहीं बल्कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए जरूरी सुरक्षा उपाय है।
राज्य के कई हिस्सों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। विशेष रूप से विदर्भ, मराठवाड़ा और खानदेश क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है। वहीं मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक जैसे बड़े शहरों में शहरी ताप द्वीप प्रभाव के कारण तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। इस कारण शहरी क्षेत्रों में भी गर्मी का असर तेजी से बढ़ता जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार कुछ इलाकों में तापमान 47 से 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक स्थिति मानी जाती है। ऐसे हालात में सरकार ने पहले से ही तैयारी तेज कर दी है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
राज्य सरकार ने 15 जिलों को हाई रिस्क जोन घोषित किया है, जिनमें लातूर, अमरावती, यवतमाल, वाशिम, अकोला, बुलढाणा, नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा, जलगांव, नंदुरबार, धुले और नांदेड़ शामिल हैं। इन जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और जरूरत पड़ने पर इस SOP को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।
गर्मी से राहत देने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों पर तैयारी शुरू की है। प्रमुख बाजारों, ट्रैफिक जंक्शनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से ओआरएस और इलेक्ट्रोलाइट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि लोगों को डिहाइड्रेशन से बचाया जा सके। इसके साथ ही श्रमिक क्षेत्रों में अस्थायी छाया, आराम स्थल और ठंडक की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।
महिला कामगारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
सरकार का मानना है कि यह SOP न केवल तत्काल राहत प्रदान करेगी बल्कि लंबे समय में हीटवेव से होने वाले जोखिमों को भी कम करने में मदद करेगी। बदलते मौसम के इस दौर में यह कदम श्रमिक वर्ग की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
