इस ट्रेंड में लोग खास AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां वे अपने एक्स पार्टनर की चैट हिस्ट्री, फोटो, सोशल मीडिया पोस्ट और निजी यादों को अपलोड करते हैं। इसके बाद सिस्टम एक वर्चुअल मॉडल तैयार करता है, जो उसी व्यक्ति की तरह जवाब देता है। कई यूजर्स इसमें अपनी पुरानी यादें, घूमने-फिरने के अनुभव और रिश्ते की खास बातें जोड़कर इसे और ज्यादा “रियल” बनाने की कोशिश करते हैं।
इस तकनीक की जड़ें Colleague.skill जैसे ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट से जुड़ी मानी जा रही हैं, जिसे मूल रूप से कार्यस्थल की बातचीत को दोबारा उपयोग करने के लिए बनाया गया था। बाद में इसे निजी रिश्तों में अपनाया जाने लगा। कुछ लोगों ने प्रयोग के तौर पर Elon Musk और Steve Jobs जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों के AI वर्जन भी बनाए।
जहां कुछ लोग इसे भावनात्मक राहत का जरिया मान रहे हैं कहते हैं कि इससे वे अपने अधूरे जज्बात व्यक्त कर पाते हैं वहीं कई विशेषज्ञ इसे खतरनाक ट्रेंड मान रहे हैं। उनका तर्क है कि यह लोगों को वास्तविकता से दूर कर सकता है और पुराने रिश्तों में उलझाकर आगे बढ़ने से रोक सकता है।
सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी को लेकर है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बिना अनुमति किसी व्यक्ति के डेटा का इस्तेमाल कर उसका डिजिटल अवतार बनाना कानून का उल्लंघन हो सकता है। इससे न सिर्फ व्यक्तिगत अधिकार प्रभावित होते हैं, बल्कि डेटा सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं
