यूक्रेन के मुताबिक, यह हमला चेल्याबिंस्क क्षेत्र के शागोल एयरबेस पर किया गया, जहां Sukhoi Su-34 जैसे बमवर्षक विमान भी तैनात थे। ड्रोन हमले के बाद इलाके में धमाकों की आवाजें सुनी गईं और सैन्य ठिकानों के पास मौजूद ट्रेनिंग सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा गया कि एक अहम एविएशन ट्रेनिंग स्कूल के हैंगर प्रभावित हुए हैं।
हालांकि, रूस की ओर से इस दावे को पूरी तरह खारिज किया गया है। चेल्याबिंस्क के गवर्नर एलेक्सी टेक्सलर ने कहा कि यह केवल एक “नाकाम ड्रोन हमला” था, जिसे समय रहते रोक दिया गया और किसी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। मॉस्को की चुप्पी और यूक्रेन के दावे—दोनों के बीच सच्चाई अब भी साफ नहीं हो पाई है।
इस हमले ने एक बार फिर यूक्रेन की बदलती युद्ध रणनीति को उजागर किया है। कीव अब सिर्फ फ्रंटलाइन पर ही नहीं, बल्कि रूस के अंदर गहराई तक जाकर हाई-वैल्यू टारगेट्स को निशाना बना रहा है। इससे पहले भी यूक्रेन ने “स्पाइडर वेब” जैसे ऑपरेशन के जरिए रूसी एयरबेस और बमवर्षक विमानों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया था, जिसकी निगरानी खुद वोलोदिमिर जेलेंस्की कर रहे थे।
सैटेलाइट तस्वीरों और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स ने पहले भी ऐसे हमलों की पुष्टि की झलक दी है, जहां रूसी एयरबेस पर जले हुए निशान और तबाह ढांचे दिखाई दिए थे। अब इस नए हमले ने यह साफ कर दिया है कि ड्रोन युद्ध इस संघर्ष का सबसे निर्णायक हथियार बनता जा रहा है।
कुल मिलाकर, रूस के अंदर इतनी गहराई में किया गया यह हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक दबाव भी है—जो यह दिखाता है कि युद्ध अब सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुश्मन के “दिल” तक पहुंच चुका है।
