दरअसल, कीलेस एंट्री सिस्टम वाली कारें वायरलेस सिग्नल के जरिए अपनी स्मार्ट चाबी से कनेक्ट रहती हैं। जैसे ही कार मालिक चाबी लेकर वाहन के पास पहुंचता है, कार अपने आप लॉक या अनलॉक हो जाती है। इसी तकनीक का फायदा उठाकर चोर अब “रिले अटैक” नाम की डिजिटल चोरी को अंजाम दे रहे हैं।
इस तकनीक में चोर खास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मदद से कार की चाबी से निकलने वाले सिग्नल को दूर से पकड़ लेते हैं और उसे कार तक पहुंचा देते हैं। कार को लगता है कि असली चाबी पास में ही मौजूद है और वह बिना किसी नुकसान के खुल जाती है। कई मामलों में चोर कुछ ही सेकंड में गाड़ी स्टार्ट करके फरार हो जाते हैं।
ऐसे में एल्युमिनियम फॉइल कार मालिकों के लिए एक आसान और सस्ता सुरक्षा उपाय बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एल्युमिनियम फॉइल “फैराडे केज” सिद्धांत पर काम करती है। यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल्स को ब्लॉक कर देती है, जिससे चाबी का वायरलेस सिग्नल बाहर नहीं जा पाता। अगर चाबी को फॉइल में अच्छी तरह लपेट दिया जाए, तो रिले अटैक करने वाले चोर सिग्नल को कैच नहीं कर पाते और कार सुरक्षित रहती है।
हालांकि, सिर्फ फॉइल पर निर्भर रहना पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जाता। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि कार की चाबी को घर के मुख्य दरवाजे या खिड़की के पास रखने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि चाबी को किसी दराज या घर के अंदर सुरक्षित स्थान पर रखा जाए, ताकि सिग्नल बाहर तक न पहुंच सके।
इसके अलावा बाजार में खास “फैराडे पाउच” या सिग्नल ब्लॉकिंग कवर भी उपलब्ध हैं, जो फॉइल की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और प्रभावी माने जाते हैं। कई ऑटोमोबाइल कंपनियां अब मोशन सेंसर और एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स वाली स्मार्ट चाबियां भी लॉन्च कर रही हैं, जो लंबे समय तक इस्तेमाल न होने पर सिग्नल भेजना बंद कर देती हैं।
तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, अपराधी भी उतने ही आधुनिक तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में कार मालिकों के लिए जरूरी है कि वे केवल हाईटेक फीचर्स पर भरोसा न करें, बल्कि सुरक्षा के छोटे-छोटे उपाय भी अपनाएं। एक साधारण एल्युमिनियम फॉइल भी आपकी लाखों की कार को डिजिटल चोरी से बचाने में मददगार साबित हो सकती है।
