रिपोर्ट्स के मुताबिक, आनंद का AI मॉडल टेक्स्ट, इमेज और स्पीच जैसे कई फॉर्मेट में काम करने में सक्षम है। दावा किया गया है कि यह मॉडल 512×512 रेजोल्यूशन तक इमेज जनरेट कर सकता है और 24kHz क्वालिटी की स्पीच आउटपुट देने की क्षमता भी रखता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इसकी तुलना दुनिया की बड़ी AI कंपनियों जैसे OpenAI और Google के मॉडल्स से की जा रही है।
मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले आनंद ने बताया कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर अपनी बचत और रनपॉड जैसी सेवाओं से मिले ग्रांट्स के सहारे काम किया। उनके पिता सरकारी अधिकारी हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। बताया जा रहा है कि केवल GPU कंप्यूटिंग पर ही परिवार के करीब 64 हजार रुपये खर्च हुए, जो एक सामान्य परिवार के लिए बड़ी रकम मानी जाती है।
आनंद का कहना है कि भारत को भी अपना स्वदेशी AI सिस्टम विकसित करना चाहिए, ताकि देश विदेशी तकनीकों पर पूरी तरह निर्भर न रहे। उनका मानना है कि जैसे अमेरिका और चीन अपने AI मॉडल तैयार कर रहे हैं, वैसे ही भारत को भी तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस AI मॉडल ने OmniDocBench V1.5 टेस्टिंग में 93.45 का स्कोर हासिल किया है। इससे पहले आनंद अपने लैपटॉप पर टेक्स्ट-टू-वीडियो सिस्टम पर भी काम कर चुके हैं। अब वह अपने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 35 हजार डॉलर की फंडिंग जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर जहां बड़ी संख्या में लोग आनंद की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स इस प्रोजेक्ट की क्षमताओं और दावों पर सवाल भी उठा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इतनी कम उम्र में इतने बड़े AI मॉडल पर काम करना बड़ी उपलब्धि है, जबकि कुछ यूजर्स इसे AI-जनरेटेड कोड या “वाइब कोडिंग” का परिणाम बता रहे हैं।
इन तमाम चर्चाओं के बीच आनंद अपने लक्ष्य पर पूरी तरह फोकस बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि वह भविष्य में अपने मॉडल के वेट्स को Hugging Face पर जारी करना चाहते हैं और बाद में पूरे कोडबेस को ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म GitHub पर उपलब्ध कराने की योजना बना रहे हैं। बिहार के इस युवा की कहानी अब उन लाखों छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणा बनती जा रही है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
