कंपनी के अनुसार, मई 2025 की तुलना में इस साल मई में कुल बिक्री में लगभग 34.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,80,077 यूनिट्स था।
घरेलू बाजार में कंपनी ने 1,93,535 वाहनों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष के 1,38,690 यूनिट्स की तुलना में लगभग 39 प्रतिशत अधिक है। वहीं, निर्यात भी बढ़कर 41,914 यूनिट्स तक पहुंच गया। इसके अलावा अन्य ऑटोमोबाइल कंपनियों को 7,239 वाहनों की आपूर्ति की गई।
मारुति के पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट, जिसमें हैचबैक, सेडान, वैन और SUV शामिल हैं, ने इस वृद्धि में सबसे अहम भूमिका निभाई। इस श्रेणी में कुल 1,90,337 वाहन बेचे गए, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 1,35,962 था।
SUV और यूटिलिटी वाहनों की मांग में भी तेज उछाल देखा गया। ब्रेजा, फ्रॉन्क्स, जिम्नी, ग्रैंड विटारा, अर्टिगा, XL6 और इनविक्टो जैसे मॉडलों की बिक्री 44.4 प्रतिशत बढ़कर 79,267 यूनिट्स तक पहुंच गई।
छोटे कार सेगमेंट में भी मजबूत वृद्धि दर्ज हुई, जहां ऑल्टो और एस-प्रेसो की बिक्री दोगुने से अधिक होकर 16,275 यूनिट्स हो गई।
कंपनी का निर्यात भी बढ़कर 41,914 यूनिट्स पर पहुंच गया, जो पिछले साल मई में 31,219 यूनिट्स था। कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी मामूली बढ़त दर्ज की गई।
मारुति सुजुकी ने इससे पहले अप्रैल में भी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की थी और लगातार मजबूत मांग के चलते कंपनी का प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है।
कंपनी भविष्य में लॉजिस्टिक्स को और अधिक कुशल बनाने के लिए रेल परिवहन का उपयोग बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके तहत 2030-31 तक वाहनों की ढुलाई में रेल हिस्सेदारी 35 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा कंपनी ने संकेत दिए हैं कि कच्चे माल और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण जून 2026 से कई मॉडलों की कीमतों में अधिकतम 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की जा सकती है।
