राज्य सरकार में मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने रविवार को पुणे के एसएम जोशी पुल पर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद समिति के गठन की घोषणा की। बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे समिति के सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे।
समिति के अन्य सदस्यों में आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पीडी नाइक शामिल हैं। समिति से एमपीएससी की भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने की अपेक्षा है।
तीन साल में 70 हजार पदों पर भर्ती की मांग
अभ्यर्थियों का आंदोलन केवल एमपीएससी के कामकाज में बदलाव तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी अगले तीन वर्षों में सरकारी विभागों के 70 हजार पदों पर भर्ती करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को गति देने के साथ परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
इसके अलावा, अभ्यर्थियों ने जनवरी में प्रस्तावित समूह-सी की परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग उठाई है। उनका जोर भर्ती के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर है, ताकि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को राहत मिल सके।
आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी रखी है। मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने आश्वासन दिया कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार के अलावा अभ्यर्थियों की अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
MPSC अध्यक्ष को हटाने की भी मांग
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने आयोग के मौजूदा अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग भी उठाई है।
हालांकि, अध्यक्ष को हटाने के संबंध में सरकार ने कोई निर्णय लिया है या नहीं, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका। समिति का गठन भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांगों के बीच हुआ है, लेकिन अभ्यर्थियों की सभी मांगों पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।
रोहित पवार ने किया मुंढे की नियुक्ति का स्वागत
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार भी अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल हैं। उन्होंने तुकाराम मुंढे को समिति का सचिव बनाए जाने का स्वागत किया।
पवार ने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे भर्ती प्रक्रिया में जरूरी सुधारों का रास्ता साफ हो सकेगा।
अब समिति की कार्यवाही और उससे सामने आने वाले सुझावों पर नजर रहेगी। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में भर्ती कैलेंडर को प्रभावी बनाना, पर्याप्त पदों पर नियुक्तियां करना और आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। सरकार की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद आंदोलनकारी अपनी बाकी मांगों पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
