सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर इस बदलाव पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का निर्णय लेने से पहले देश के लोगों से सलाह ली थी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस फैसले से जुड़े किसी हितधारक या संगठन से विचार-विमर्श किया गया। दास ने अपने बयान में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह का कदम उठाने से पहले संबंधित पक्षों की राय जानना जरूरी है।
अपने पोस्ट में दास ने केंद्र सरकार के फैसले को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की। उन्होंने लिखा कि जिस तरह जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाया जा रहा है, उसी तरह प्रधानमंत्री जल्द ही भारत में लोकतंत्र को भी अधिसूचित सूची से बाहर कर देंगे। उन्होंने इस कार्रवाई को उस दिशा में शुरुआत बताया। दास ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को स्वीकार नहीं करती और इसे मनमाना निर्णय मानती है। हालांकि, लोकतंत्र को लेकर की गई उनकी टिप्पणी उनके राजनीतिक विरोध और फैसले पर व्यक्त की गई प्रतिक्रिया का हिस्सा है।
सौरव दास ने अपने बयान में विरोध करने और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाना लोगों के मौलिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने इस फैसले के विरोध में कहा कि अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बन रहा है। उनकी इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव होने के बावजूद विरोध की भावना समाप्त नहीं होगी।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। इन स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले लोगों को संबंधित नियमों और अनुमति की शर्तों का पालन करना होगा। इस तरह जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने के बाद राजधानी में प्रदर्शन के लिए इन तीन जगहों का विकल्प उपलब्ध कराया गया है।
जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में धरना-प्रदर्शन और विरोध दर्ज कराने का प्रमुख केंद्र रहा है। विभिन्न मुद्दों पर अपनी मांगें रखने के लिए लोग यहां जुटते रहे हैं। ऐसे में इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर सौरव दास की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने निर्णय की प्रक्रिया, संबंधित पक्षों से परामर्श और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को वैकल्पिक स्थान के रूप में निर्धारित किया गया है, जहां नियमों और अनुमति संबंधी शर्तों के अनुसार प्रदर्शन किए जा सकेंगे।
