दरअसल, इस साल की शुरुआत में एक ओटीटी प्लेटफॉर्म ने अपने 2026 कंटेंट लाइनअप की घोषणा की थी, जिसमें मनोज बाजपेयी अभिनीत फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ भी शामिल थी। फिल्म का नाम सामने आते ही सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया। कई संगठनों, सामाजिक समूहों और राजनीतिक नेताओं ने इस टाइटल पर आपत्ति जताई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि विवाद अदालत और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। बाद में अदालत के निर्देश और बढ़ते विरोध को देखते हुए मेकर्स ने फिल्म का टाइटल वापस लेने और बदलने का फैसला किया।
हाल ही में पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में मनोज बाजपेयी ने कहा कि फिल्म की टीम को इस तरह के बड़े विवाद की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। उन्होंने बताया कि जैसे ही यह महसूस हुआ कि बड़ी संख्या में लोग फिल्म के नाम से आहत हैं, मेकर्स ने सिर्फ दो दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी। मनोज के मुताबिक अगर किसी रचनात्मक कार्य से लोगों की भावनाएं आहत होती हैं, तो उसे सुधारने में कोई हर्ज नहीं है।
उन्होंने कहा कि एक क्रिएटिव व्यक्ति के लिए किसी फिल्म का टाइटल बदलना कोई बड़ी बात नहीं होती। उनके अनुसार फिल्म निर्माता और लेखक कई नए और बेहतर नाम सोच सकते हैं। इसलिए फिल्म के नाम को लेकर उनकी ओर से कभी कोई जिद नहीं थी।
हालांकि विवाद का सबसे कठिन पहलू वह था जब यह व्यक्तिगत स्तर तक पहुंच गया। मनोज बाजपेयी ने खुलासा किया कि इस दौरान उन्हें लगातार ऑनलाइन ट्रोलिंग, गालियां और धमकियों का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं, कई लोगों ने उनके परिवार को भी इस विवाद में घसीटना शुरू कर दिया, जिससे उनके परिजन परेशान और चिंतित हो गए थे।
मनोज ने कहा कि जब उन्हें धमकियां मिल रही थीं तब भी वह लगातार यात्रा कर रहे थे और अपने काम में व्यस्त थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई डर महसूस नहीं हुआ, लेकिन जब किसी व्यक्ति के परिवार को निशाना बनाया जाता है, तब स्थिति दुखद हो जाती है। अभिनेता ने कहा कि ऐसे लोगों के प्रति उन्हें गुस्से से ज्यादा सहानुभूति महसूस होती है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर बिना पूरी जानकारी के राय बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। मनोज का कहना है कि आज कई लोग किसी विषय को समझने से पहले ही निष्कर्ष निकाल लेते हैं। उन्होंने कहा कि वह पढ़े-लिखे और समझदार व्यक्ति हैं तथा किसी मुद्दे को गहराई से समझने में विश्वास रखते हैं। लेकिन जो लोग बिना तथ्य जाने राय बना लेते हैं, उनसे बहस करने में न तो उनकी रुचि है और न ही समय।
गौरतलब है कि विवाद के बाद फिल्म का मूल टाइटल वापस ले लिया गया था और नए नाम की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। वहीं मनोज बाजपेयी की नई फिल्म ‘गवर्नर’ 12 जून को रिलीज होने वाली है, जिससे उनके प्रशंसकों को काफी उम्मीदें हैं।
इस पूरे विवाद पर मनोज बाजपेयी का बयान एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी विषय पर प्रतिक्रिया देने से पहले तथ्यों को समझना कितना जरूरी है।
