जानकारी के अनुसार नागा चैतन्य ने अपनी याचिका में कहा है कि कई वेबसाइट्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर और पहचान का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही उनके बारे में ऐसे दावे किए जा रहे हैं जो न केवल झूठे हैं बल्कि उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करते हैं। अभिनेता का कहना है कि यह पूरा मामला उनकी डिजिटल पहचान और सम्मान से जुड़ा हुआ है, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
याचिका में विशेष रूप से उन ऑनलाइन पोस्ट और वीडियो का उल्लेख किया गया है जिनमें यह दावा किया गया था कि नागा चैतन्य ने अपनी पूर्व पत्नी सामंथा रूथ प्रभु को धोखा दिया था या उनके करियर को प्रभावित किया था। अभिनेता ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह आधारहीन और भ्रामक बताया है और कहा है कि इस तरह की सामग्री से जनता के बीच गलत धारणा बन रही है।
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने प्राथमिक स्तर पर अभिनेता को अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने ऐसे सभी ऑनलाइन कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए हैं, जो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने एआई और डीपफेक तकनीक के माध्यम से बनाए जा रहे आपत्तिजनक कंटेंट पर भी चिंता जताई है और इस तरह के मामलों में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
गौरतलब है कि नागा चैतन्य और अभिनेत्री सामंथा रूथ प्रभु ने वर्ष 2021 में आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया था। तलाक के बाद दोनों को लेकर कई तरह की अटकलें और अफवाहें सामने आती रही हैं, जिन्हें दोनों कलाकारों ने समय-समय पर खारिज भी किया है। नागा चैतन्य पहले भी एक इंटरव्यू में यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे और सामंथा एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं।
इस ताजा कानूनी कदम को अभिनेता की छवि संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही गलत सूचनाओं के खिलाफ यह मामला आने वाले समय में एक उदाहरण बन सकता है, जहां सार्वजनिक हस्तियां अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए न्यायिक प्रणाली का सहारा ले रही हैं।
