सनी देओल का असली नाम अजय सिंह देओल है। उनका जन्म पंजाब के साहनेवाल में हुआ था। परिवार में उन्हें सनी नाम से पुकारा जाता था और फिल्मों में आने के बाद उन्होंने इसी नाम को अपना लिया। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने ब्रिटेन के बर्मिंघम स्थित ओल्ड रिप थिएटर में प्रशिक्षण लिया। एक बातचीत में उन्होंने बताया था कि विदेश जाकर सीखने का एक उद्देश्य यह भी था कि लोग उन्हें धर्मेंद्र के बेटे के बजाय एक सामान्य विद्यार्थी के रूप में देखें। वह स्वभाव से संकोची थे और अभिनय की बुनियादी बातें सीखना चाहते थे। शशि कपूर की मदद से उन्हें वहां दाखिला मिला था।
1983 में फिल्म ‘बेताब’ से सनी देओल ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इस फिल्म का निर्माण उनके पिता धर्मेंद्र ने किया था और निर्देशन राहुल रवैल ने किया था। फिल्म में अमृता सिंह उनके साथ मुख्य भूमिका में थीं। युवा प्रेम, पारिवारिक बंदिशों और भावनात्मक टकराव पर आधारित इस रोमांटिक ड्रामा को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिला। हालांकि, सनी की पहचान बाद में एक्शन फिल्मों से अधिक मजबूत हुई। ‘अर्जुन’, ‘डकैत’, ‘पाप की दुनिया’, ‘यतीम’, ‘वर्दी’, ‘त्रिदेव’ और ‘चालबाज’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक्शन हीरो के रूप में स्थापित करने में भूमिका निभाई।
सनी देओल के करियर में 1990 में आई ‘घायल’ महत्वपूर्ण साबित हुई। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने बॉक्सर अजय मेहरा का किरदार निभाया था। सनी ने बताया था कि उस समय कई लोग फिल्म के निर्माण के लिए तैयार नहीं थे, क्योंकि बाजार में रोमांटिक फिल्मों का बोलबाला था और कुछ लोगों को इसमें जरूरत से ज्यादा एक्शन दिखाई देता था। आखिरकार फिल्म के निर्माण की जिम्मेदारी उनके परिवार ने संभाली और धर्मेंद्र निर्माता बने। इसके बाद ‘दामिनी’, ‘घातक’, ‘जिद्दी’ और ‘बॉर्डर’ जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को और मजबूत किया।
हालांकि, 2000 के शुरुआती वर्षों में सनी देओल को करियर में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ‘फर्ज’, ‘चैंपियन’ और ‘इंडियन’ जैसी फिल्मों के बावजूद वह लगातार बड़ी सफलताएं हासिल नहीं कर सके। वर्ष 2001 में आई ‘गदर’ ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी, लेकिन इसके बाद भी उनकी सभी फिल्में सफल नहीं रहीं। फिर लगभग 22 साल बाद ‘गदर 2’ रिलीज हुई और ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस सफलता ने उनके करियर की दूसरी पारी को नई मजबूती दी। इसके बाद वह ‘जाट’, ‘बॉर्डर 2’ और ‘बंटवारा 1947’ जैसी परियोजनाओं से जुड़े। उन्होंने ओटीटी पर ‘इक्का’ के जरिए भी कदम रखा। आने वाली फिल्म ‘रामायण’ में वह हनुमान की भूमिका निभाते नजर आएंगे।
सनी देओल की निजी जिंदगी से जुड़े कई किस्से भी चर्चित रहे हैं। उन्होंने 1984 में लिंडा से शादी की थी, जिन्होंने बाद में पूजा देओल नाम अपनाया। ‘बेताब’ की शूटिंग के दौरान अमृता सिंह उन्हें पसंद करने लगी थीं, लेकिन सनी के शादीशुदा होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने दूरी बना ली। सनी यश चोपड़ा की फिल्म ‘मशाल’ में काम करने वाले थे, लेकिन धर्मेंद्र की सलाह पर उन्होंने यह फिल्म नहीं की। डिंपल कपाड़िया के साथ उनकी नजदीकियों को लेकर भी लंबे समय तक चर्चाएं होती रहीं।
1993 में फिल्म ‘डर’ की शूटिंग के दौरान सनी देओल और शाहरुख खान के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थीं। सनी अपने किरदार को कमजोर दिखाए जाने और शाहरुख को अधिक महत्व दिए जाने से नाराज बताए गए। एक चर्चित किस्से के अनुसार, सेट पर गुस्से में उन्होंने अपनी जींस तक फाड़ दी थी। दोनों के बीच लंबे समय तक दूरी बनी रही, हालांकि ‘गदर 2’ की रिलीज के बाद रिश्तों में सुधार की चर्चा हुई।
निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ भी सनी के मतभेद हुए थे। भगत सिंह पर फिल्म बनाने और बॉबी देओल को भूमिका नहीं दिए जाने को लेकर दोनों के बीच विवाद बताया गया। इसके बाद संतोषी ने अजय देवगन के साथ ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ बनाई, जबकि सनी देओल ने अपने भाई बॉबी के साथ ‘23 मार्च 1931: शहीद’ बनाई। दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज हुई थीं। बाद में सनी और संतोषी ने मतभेद भुलाकर ‘बंटवारा 1947’ में साथ काम किया।
सनी देओल ने राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाई। अप्रैल 2019 में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और गुरदासपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बने। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार सुनील जाखड़ को हराया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने दोबारा चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई और राजनीति को अपने लिए उपयुक्त क्षेत्र नहीं बताया। इसके बाद उनका ध्यान फिर फिल्मों पर केंद्रित हो गया।
