बीते सप्ताह बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और पश्चिम एशिया से जुड़ी कुछ सकारात्मक उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया था। हालांकि सप्ताह आगे बढ़ने के साथ वैश्विक अनिश्चितताओं ने दोबारा बाजार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक जोखिमों को लेकर बढ़ी चिंता के कारण बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली। सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया, जिससे प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।
अब निवेशकों का पूरा ध्यान अगले सप्ताह जारी होने वाले आर्थिक आंकड़ों और नीतिगत फैसलों पर केंद्रित है। सप्ताह की शुरुआत विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों के साथ होगी। मई महीने के मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई के आंकड़े देश की औद्योगिक गतिविधियों, मांग की स्थिति और कारोबारी माहौल की दिशा का शुरुआती संकेत देंगे। इसके साथ ही विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों की मासिक बिक्री रिपोर्ट भी बाजार के लिए अहम रहेगी, क्योंकि इससे उपभोक्ता मांग और आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाया जाता है।
घरेलू स्तर पर औद्योगिक उत्पादन से जुड़े आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। ये आंकड़े विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्र के प्रदर्शन की तस्वीर पेश करेंगे। मजबूत उत्पादन आंकड़े आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत दे सकते हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन बाजार में सतर्कता बढ़ा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े भी वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी सेवा क्षेत्र और रोजगार से जुड़े प्रमुख संकेतकों को लेकर निवेशकों में विशेष रुचि बनी हुई है। इन आंकड़ों के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन किया जाएगा और यह भी तय होगा कि भविष्य में ब्याज दरों को लेकर वहां की केंद्रीय बैंकिंग व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ सकती है। इसका असर वैश्विक पूंजी प्रवाह, उभरते बाजारों में निवेश और विदेशी निवेशकों की रणनीतियों पर दिखाई दे सकता है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा केंद्र बिंदु भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होगी। तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक के बाद ब्याज दरों, महंगाई, आर्थिक विकास और वित्तीय प्रणाली की स्थिति को लेकर केंद्रीय बैंक का दृष्टिकोण सामने आएगा। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों के शेयरों पर इस निर्णय का सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक द्वारा मानसून, खाद्य महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर किए गए आकलन पर भी निवेशकों की विशेष नजर रहेगी।
सप्ताह के अंत में देश की आर्थिक वृद्धि से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जारी किए जाएंगे। प्रारंभिक जीडीपी वृद्धि दर और मार्च तिमाही के प्रदर्शन से भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। यदि वृद्धि दर अनुमान से बेहतर रहती है तो इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। वहीं कमजोर आंकड़े बाजार में दबाव बढ़ा सकते हैं।
इसी दिन अमेरिका के रोजगार आंकड़े और बेरोजगारी दर भी जारी होगी। ये आंकड़े वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इनके आधार पर अंतरराष्ट्रीय निवेश धारणा प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे। ऐसे में आने वाला सप्ताह निवेशकों के लिए सतर्कता, विश्लेषण और रणनीतिक निवेश निर्णयों का सप्ताह साबित हो सकता है।
