नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन के बीच दुकानदारों को राहत मिली है। यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली थी, लेकिन अब इसे दीपावली के बाद तक स्थगित कर दिया गया है। नई तारीख को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। इस फैसले से छोटे और बड़े कारोबारियों ने राहत की सांस ली है।
यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की खबर सामने आने के बाद कई दुकानदारों की चिंता बढ़ गई थी। कारोबारियों को आशंका थी कि अतिरिक्त शुल्क लागू होने से उनके खर्च में बढ़ोतरी होगी और इसका असर कारोबार पर पड़ सकता है। इसी वजह से कुछ दुकानदार ग्राहकों से यूपीआई के जरिए भुगतान लेने से बचने लगे थे। कई दुकानों पर नकद भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही थी, जबकि कुछ कारोबारियों ने अपनी दुकानों से यूपीआई क्यूआर कोड हटाने भी शुरू कर दिए थे।
अब शुल्क लागू करने का फैसला स्थगित होने से दुकानदारों को राहत मिली है। कई कारोबारियों का कहना है कि वे दोबारा अपनी दुकानों पर क्यूआर कोड लगाएंगे, ताकि ग्राहक पहले की तरह डिजिटल माध्यम से भुगतान कर सकें। त्योहारी मौसम में खरीदारी बढ़ने के दौरान यूपीआई भुगतान की सुविधा कारोबारियों और ग्राहकों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में प्रस्तावित शुल्क पर रोक से दुकानदार फिलहाल अपने कारोबार पर ध्यान दे सकेंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, अब इसकी समयसीमा आगे बढ़ा दी गई है। नई तारीख को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। कारोबारियों को आगे होने वाले फैसले का इंतजार है कि शुल्क व्यवस्था किस तारीख से लागू होगी या इस संबंध में क्या निर्णय लिया जाएगा।
दिल्ली के लाजपत नगर में एक दुकानदार ने कहा कि यूपीआई लेनदेन को शुल्क-मुक्त रखने से कारोबारियों को काफी फायदा हुआ है। त्योहारों के दौरान ग्राहक बिना किसी झिझक के यूपीआई से भुगतान कर रहे हैं। इससे दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है और कारोबार सामान्य रूप से चलता है। दुकानदार के मुताबिक, डिजिटल भुगतान की सुविधा ग्राहकों के लिए उपयोगी है और इससे खरीदारी के समय भुगतान करना आसान रहता है।
दुकानदार ने इस फैसले को सकारात्मक बताया। हालांकि, उसने यह भी कहा कि आगे इस व्यवस्था को जारी रखने के संबंध में क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखना होगा। शुल्क लगाने की नई तारीख तय होने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
कारोबारियों का कहना है कि यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में इस तरह के लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से छोटे दुकानदारों और ग्राहकों पर आर्थिक असर पड़ सकता है। फिलहाल फैसला टलने से दुकानदारों को राहत मिली है। अब वे त्योहारी सीजन में ग्राहकों को डिजिटल भुगतान की सुविधा देने और अपने कारोबार पर ध्यान केंद्रित करने की तैयारी कर रहे हैं।
