दुनियाभर में वास्तुकला और डिजाइन उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध प्रिक्स वर्साय पुरस्कारों के तहत नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तथा गुवाहाटी स्थित लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 को इस विशेष सूची में स्थान मिला है। यह सम्मान उन परियोजनाओं को दिया जाता है जो वास्तु सौंदर्य, नवाचार, पर्यावरणीय संतुलन और यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं।
नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 को उसके अनूठे और भविष्यवादी डिजाइन के लिए सराहा गया है। इसका स्थापत्य स्वरूप भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण प्रतीक कमल के फूल से प्रेरित है। आधुनिक तकनीक, विशाल संरचना, ऊर्जा दक्षता और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह टर्मिनल भारत के उभरते बुनियादी ढांचे की नई पहचान बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना देश में आधुनिक विमानन केंद्रों के विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
वहीं, गुवाहाटी एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 ने भी अपनी विशिष्ट डिजाइन अवधारणा के कारण वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। इसके निर्माण में असम की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संपदा और स्थानीय जैव विविधता को विशेष महत्व दिया गया है। टर्मिनल का डिजाइन बांस और ऑर्किड जैसे क्षेत्रीय प्राकृतिक तत्वों से प्रेरित है, जो पूर्वोत्तर भारत की विशिष्ट पहचान को दर्शाता है। पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों और स्थानीय सौंदर्य को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ने का प्रयास इसे अन्य परियोजनाओं से अलग बनाता है।
इस वैश्विक सूची में दुनिया के कई प्रतिष्ठित हवाई अड्डों को भी स्थान मिला है। इनमें यूरोप, अमेरिका और एशिया के प्रमुख विमानन केंद्र शामिल हैं, जिन्हें उनकी उन्नत सुविधाओं और विशिष्ट डिजाइन के लिए जाना जाता है। ऐसे प्रतिस्पर्धी वैश्विक परिदृश्य में भारतीय परियोजनाओं का चयन देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में तेजी से विकसित हो रहे विमानन क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व विस्तार देखा है। बढ़ती हवाई यात्रा, आधुनिक हवाई अड्डों का निर्माण और यात्रियों की सुविधाओं में सुधार ने देश को वैश्विक विमानन मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। नवी मुंबई और गुवाहाटी की यह उपलब्धि उसी परिवर्तनशील यात्रा का हिस्सा मानी जा रही है।
विमानन और अवसंरचना क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता भविष्य में भारत में निवेश आकर्षित करने, पर्यटन को बढ़ावा देने और विश्वस्तरीय हवाई अड्डों के विकास को नई गति देने में सहायक होगी। साथ ही यह उपलब्धि भारतीय डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को भी दर्शाती है।
वर्ष 2026 के अंत में इन चयनित परियोजनाओं में से कुछ को सर्वोच्च वैश्विक खिताब प्रदान किए जाने की संभावना है। ऐसे में भारतीय हवाई अड्डों की यह उपलब्धि आने वाले महीनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकती है तथा देश के विमानन क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।
