पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली थी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गए थे। बाजार पूंजीकरण में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर अभी भी बना हुआ है।
आज के कारोबार में सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों का रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की धारणा पर पड़ता है।
हालांकि बाजार के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी मौजूद हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदम और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की लगातार खरीदारी बाजार को समर्थन दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू निवेश प्रवाह बाजार में बड़ी गिरावट को सीमित कर सकता है।
तकनीकी दृष्टि से देखें तो निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह स्तर बना रहता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं इसके नीचे फिसलने पर बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने से बचने और गुणवत्ता वाले शेयरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
बैंकिंग, एफएमसीजी और चुनिंदा डिफेंस शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है, जबकि आईटी और निर्यात आधारित सेक्टर वैश्विक दबाव के कारण कमजोर रह सकते हैं। कुल मिलाकर आज का दिन बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है, लेकिन चुनिंदा सेक्टरों में अवसर भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रणनीति के साथ बाजार में कदम रखने की जरूरत होगी।
