नई दिल्ली। बैंक खाते (Bank Accounts) में बड़ी नकद रकम जमा होते ही आयकर विभाग (Income Tax Department) की नजर उस पर पड़ सकती है। खासकर नोटबंदी (Demonetization) के बाद से नकद जमा, कैश बिक्री और कारोबार की नकदी को लेकर जांच का दायरा बढ़ा है। आयकर अपीलीय अधिकरण (Income Tax Appellate Tribunal) यानी आईटीएटी के हालिया फैसलों ने एक बात साफ कर दी है…सिर्फ बैंक में कैश जमा होना अपराध नहीं है। सवाल यह है कि उस कैश का स्रोत क्या है और क्या करदाता उसे साबित कर सकता है।
क्या है पूरा मामला?
हालिया मामलों में आयकर विभाग ने नोटबंदी के दौरान जमा बड़ी नकद रकम को अघोषित आय मानकर टैक्स की मांग की। एक मामले में स्क्रैप कारोबारी के खाते में 1.28 करोड़ नकद जमा हुए थे। विभाग ने इसे शक के दायरे में मानते हुए भारी टैक्स मांग बनाई। करदाता ने कहा, यह रकम उसके स्क्रैप कारोबार की बिक्री से जुड़ी थी। पिछले वर्षों में भी इसी तरह के कारोबार और नकद बिक्री को विभाग स्वीकार कर चुका था। आईटीएटी ने करदाता को राहत देते हुए कहा, अगर कारोबार का पुराना रिकॉर्ड, बहीखाते और बिक्री का पैटर्न नकद जमा को समर्थन देते हैं, तो केवल बैंक में पैसा जमा होने से उसे अघोषित आय नहीं कहा जा सकता।
फिर दूसरे मामले में करदाता क्यों हारा
दिल्ली आईटीएटी के एक अन्य मामले में 1.34 करोड़ की नकद जमा को लेकर करदाता को राहत नहीं मिली। करदाता ने इसे नकद बिक्री बताया, लेकिन जांच में खरीद-बिक्री के दावों, दस्तावेजों और लेनदेन में गंभीर विसंगतियां मिलीं। खरीद लेनदेन वास्तविक नहीं लगे और बिक्री की कहानी बहीखातों से मजबूत तरीके से साबित नहीं हो पाई। आईटीएटी ने माना, कारोबार की कहानी कागजों पर बनाई गई लगे और खरीद बिक्री का आधार भरोसेमंद न हो, तो नकद जमा अघोषित आय मानी जाएगी।
आईटीएटी का संदेश क्या है?
– दोनों फैसलों का सार है कि आयकर विभाग सिर्फ रकम नहीं, बल्कि उसकी कहानी देखता है। बैंक में जमा नकद आपकी आय, कारोबार, पुराने रिकॉर्ड, खरीद-बिक्री बिल, स्टॉक रजिस्टर और कैश बुक से मेल खाती है, तो उसे समझाया जा सकता है।
– अगर रिटर्न में कम आय दिखाई गई हो, कारोबार का रिकॉर्ड कमजोर हो और अचानक खाते में लाखों या करोड़ों रुपये नकद जमा हो जाएं, तो नोटिस आने और टैक्स मांग बनने की आशंका बढ़ जाती है।
– अगर नकद जमा अघोषित आय मानी गई, तो आयकर कानून की धारा 69ए और 115बीबीई के तहत टैक्स बहुत भारी पड़ सकता है।
ये दस्तावेज जरूरी
नकद बिक्री या कारोबार से आई रकम साबित करने के लिए करदाता के पास खरीद-बिक्री बिल, स्टॉक रजिस्टर, कैश बुक, बैंक स्टेटमेंट, जीएसटी रिटर्न, आयकर रिटर्न, पुराने वर्षों का टर्नओवर और ग्राहक सप्लायर रिकॉर्ड होना चाहिए। अगर कारोबारी कहता है कि नकद जमा बिक्री से आया है, तो उसे दिखाना होगा कि उसके पास इतना स्टॉक था, बिक्री वास्तव में हुई थी और रकम बहीखातों में सही तरीके से दर्ज थी।
