शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स हल्की गिरावट के साथ 77,976 के स्तर के आसपास खुला, जबकि निफ्टी भी कमजोरी के साथ 24,166 के करीब पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे निवेशकों का रुख पहले से ही सतर्क बना हुआ था और बाजार में भरोसे की कमी दिखाई दी।
बाजार की इस कमजोरी का असर बैंकिंग सेक्टर पर भी पड़ा, जहां प्रमुख बैंकिंग शेयरों में दबाव देखने को मिला। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश रणनीति अपना रहे हैं। वित्तीय शेयरों में बिकवाली ने बाजार की चाल को और कमजोर किया।
वैश्विक स्तर पर भी मिश्रित संकेत देखने को मिल रहे हैं। एशियाई बाजारों में गिरावट का रुख बना हुआ है, जहां कई प्रमुख सूचकांक कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी बाजारों में पिछले सत्र में हल्की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर दिखाई नहीं दिया।
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कुछ राहत का संकेत है। इसके बावजूद निवेशक पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और बाजार में सतर्कता बनी हुई है।
डॉलर की मजबूती भी बाजार पर दबाव बना रही है। मजबूत डॉलर के कारण विदेशी निवेश प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे उभरते बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना रहती है। यही कारण है कि घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत जरूर सामने आए हैं, लेकिन निवेशक अभी भी किसी ठोस परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। प्रमुख देशों के बीच चल रही बातचीत का सीधा असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है, इसलिए बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे धैर्य बनाए रखें और सोच-समझकर निवेश निर्णय लें।
