नई दिल्ली । स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले जोखिमों की चर्चा में आमतौर पर धूम्रपान, शराब, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता को प्रमुख कारण माना जाता है। हालांकि, लंबे समय तक बना रहने वाला अकेलापन भी शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। हेल्थ एजुकेटर और डॉक्टर एरिक बर्ग ने अकेलेपन को लेकर लोगों को सावधान किया है और इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर ध्यान देने की बात कही है।
अकेलापन केवल किसी व्यक्ति का कुछ समय के लिए अकेले रहना नहीं है। समस्या तब बढ़ सकती है जब व्यक्ति लंबे समय तक सामाजिक संपर्क से दूर रहे, उसके पास बातचीत करने वाले लोग कम हों या उसे भावनात्मक रूप से अलग-थलग महसूस हो। ऐसी स्थिति लगातार बनी रहने पर तनाव और मानसिक दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर शरीर के अलग-अलग तंत्रों पर पड़ सकता है।
डॉक्टर एरिक बर्ग के अनुसार, लंबे समय तक सामाजिक अलगाव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में अकेलेपन की तुलना कई अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से करते हुए इसे गंभीरता से लेने की जरूरत बताई। हालांकि, अकेलेपन को सीधे तौर पर प्रतिदिन 15 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुंचाने वाला बताना एक लोकप्रिय स्वास्थ्य दावा है, जिसे संदर्भ और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर सावधानी से समझना जरूरी है।
लगातार अकेलेपन और तनाव की स्थिति में शरीर का तनाव प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय रह सकता है। इससे तनाव से जुड़े हार्मोन और रक्तचाप प्रभावित हो सकते हैं। लंबे समय तक बढ़ा हुआ तनाव हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है और हृदय रोग तथा स्ट्रोक जैसे रोगों से जुड़े अन्य जोखिमों को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।
अकेलेपन का असर प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी पड़ सकता है। लगातार मानसिक तनाव शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। इससे संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया और बीमारी से उबरने की प्रक्रिया पर असर पड़ने की संभावना रहती है।
मानसिक स्वास्थ्य के स्तर पर सामाजिक संपर्क की कमी चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं के जोखिम से जुड़ी हुई है। परिवार, दोस्तों और समाज के साथ स्वस्थ संवाद व्यक्ति को भावनात्मक समर्थन देता है। जब यह संपर्क लगातार कम हो जाता है तो तनाव से निपटने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और नकारात्मक भावनाएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।
अकेलेपन का संबंध नींद की गुणवत्ता से भी देखा गया है। लगातार चिंता, असुरक्षा या तनाव के कारण कुछ लोगों को सोने में परेशानी हो सकती है। पर्याप्त और अच्छी नींद नहीं मिलने पर दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।
लंबे समय तक सामाजिक अलगाव का असर सोचने और समझने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। सामाजिक गतिविधियों और बातचीत से दिमाग लगातार सक्रिय रहता है। उम्र बढ़ने के साथ सामाजिक अलगाव और संज्ञानात्मक गिरावट के बीच संबंध को लेकर भी शोध हुआ है। हालांकि, अकेलापन अकेले ही डिमेंशिया का कारण है, ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अकेलेपन को नजरअंदाज करने के बजाय नियमित सामाजिक संपर्क बनाए रखना उपयोगी हो सकता है। परिवार और दोस्तों से बातचीत, सामुदायिक गतिविधियों में भागीदारी, पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना मददगार कदम हो सकते हैं। लंबे समय तक अकेलापन महसूस करने वाले व्यक्ति को इसे केवल व्यक्तिगत कमजोरी मानने के बजाय स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति के रूप में गंभीरता से लेना चाहिए।
