वयस्कों के लिए रात में 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है। गहरी नींद के दौरान दिमाग, हार्मोन, इम्यून सिस्टम और शरीर के कई दूसरे हिस्से अपना काम जारी रखते हैं। रात में नींद नॉन-आरईएम और आरईएम चरणों से होकर गुजरती है। ये चरण रात में कई बार आते हैं और आम तौर पर एक नींद चक्र करीब 80 से 100 मिनट का होता है। नॉन-आरईएम नींद के तीसरे चरण को गहरी नींद कहा जाता है। इस दौरान शरीर की धड़कन और सांस की गति धीमी हो जाती है और शरीर मरम्मत तथा ऊर्जा बहाली से जुड़े काम करता है। वहीं आरईएम नींद के दौरान दिमाग काफी सक्रिय रहता है और सपने अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।
नींद के दौरान दिमाग का काम केवल सपने देखने तक सीमित नहीं रहता। यह दिनभर हासिल की गई जानकारियों को व्यवस्थित करने और याददाश्त बनाने की प्रक्रिया में भी शामिल रहता है। नींद की कमी या खराब नींद का असर ध्यान केंद्रित करने, नई जानकारी समझने और चीजों को याद रखने की क्षमता पर पड़ सकता है। आरईएम और नॉन-आरईएम नींद के अलग-अलग चरण सीखने और याददाश्त से जुड़े विभिन्न कामों में भूमिका निभाते हैं। इस दौरान शरीर भी अपने स्तर पर जरूरी बदलावों से गुजरता रहता है, इसलिए पूरी और अच्छी नींद अगले दिन शरीर और दिमाग को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
गहरी नींद में शरीर के ऊतकों की वृद्धि और मरम्मत से जुड़े काम होते हैं। इसी दौरान कुछ हार्मोन भी रिलीज होते हैं। ग्रोथ हार्मोन शरीर के विकास के साथ मांसपेशियों और ऊतकों की मरम्मत में भूमिका निभाता है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने ग्लिम्फैटिक सिस्टम नाम की एक व्यवस्था का भी अध्ययन किया है, जो दिमाग से कुछ मेटाबॉलिज्म संबंधी अपशिष्ट पदार्थों को हटाने का काम करती है। इस तरह रात की नींद को केवल आराम का समय समझना सही नहीं है। नींद के दौरान शरीर में मरम्मत, याददाश्त, हार्मोन और दिमागी गतिविधियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं चलती रहती हैं। यही कारण है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त और अच्छी नींद को जरूरी माना जाता है।
