डॉ एल एन वैष्णव,
दमोह से जुड़े कथित आधार आईडी दुरुपयोग प्रकरण ने राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल पहचान प्रणाली की विश्वसनीयता और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में एफआईआर दर्ज हुए 13 माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक आरोपी अज्ञात हैं और जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है।
जांच के दौरान दो आधार ऑपरेटर आईडी के विभिन्न राज्यों में उपयोग होने के संकेत मिलने की बात सामने आई। वहीं जबलपुर में पकड़े गए कुछ अफगानी नागरिकों के दस्तावेजों के आधार सत्यापन से जुड़े कथित तार भी इस मामले को और संवेदनशील बना देते हैं। यदि जांच में सामने आए रिकॉर्ड सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल दस्तावेजी अनियमितता नहीं बल्कि बहु-राज्यीय नेटवर्क और पहचान प्रणाली के संभावित दुरुपयोग का विषय बन सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रिकॉर्ड, लॉग और तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध बताए जा रहे हैं, तब भी जिम्मेदार व्यक्तियों तक जांच एजेंसियां क्यों नहीं पहुंच सकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधार जैसी पहचान प्रणाली में किसी भी प्रकार की सेंध या दुरुपयोग की आशंका केवल प्रशासनिक चिंता नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय भी है।
जनता अब जानना चाहती है कि—
- जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
- क्या सभी तकनीकी पहलुओं की गहन जांच हुई है?
- क्या किसी केंद्रीय या विशेषज्ञ एजेंसी की सहायता ली गई है?
- और सबसे महत्वपूर्ण, इस मामले के दोषियों की पहचान कब तक होगी?
आधार प्रणाली देश के करोड़ों नागरिकों की पहचान, बैंकिंग, दूरसंचार और सरकारी सेवाओं की आधारशिला बन चुकी है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच केवल कानूनी आवश्यकता नहीं, बल्कि जनता के भरोसे को बनाए रखने की भी अनिवार्य शर्त है।
