करेरा(शिवपुरी)। मध्यप्रदेश के रीवा जिले में जैन आर्यिका माताओं की सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु के बाद देशभर में जैन संतों की सुरक्षा को लेकर आवाज तेज हो गई है। इसी क्रम में सोमवार को करेरा में सकल जैन समाज, विभिन्न जैन संगठनों एवं राष्ट्रभक्त सर्वर्ण समाज संगठन के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा रीवा प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
समाजजनों ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) एवं थाना करेरा के नगर निरीक्षक विनोद छावई को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि रीवा जिले में राष्ट्रसंत आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के संघ से जुड़ी आर्यिका श्री 105 श्रुतमती माताजी एवं आर्यिका श्री 105 उपशममती माताजी का असामयिक निधन अत्यंत दुखद और समाज को आहत करने वाला है। इस घटना ने जैन समाज के साथ-साथ अहिंसा और आध्यात्मिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले लोगों को भी गहरी पीड़ा पहुंचाई है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि जैन संत-साध्वी तप, त्याग, संयम और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए पैदल विहार करते हैं। वे किसी प्रकार की भौतिक सुविधा या सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते, बल्कि समाज को शांति, करुणा और सद्भाव का संदेश देते हैं। ऐसे संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
समाज ने मांग की कि रीवा घटना की उच्चस्तरीय, पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या दोष सिद्ध हो तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकारें देशभर में विहाररत जैन साधु-संतों के लिए विशेष सुरक्षा नीति लागू करें, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यह केवल जैन समाज का विषय नहीं, बल्कि भारत की संत परंपरा, आध्यात्मिक विरासत और अहिंसा के मूल्यों की रक्षा का प्रश्न है। देशभर में जिला मुख्यालयों, तहसीलों एवं नगरों में ज्ञापन देकर शासन-प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया जा रहा है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान समाज के वरिष्ठजन, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, महिला मंडल, युवा संगठन तथा बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। जैन समाज ने शासन से शीघ्र प्रभावी कदम उठाने और संतों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपेक्षा जताई है।
