मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में ग्वालियर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, रतलाम, झाबुआ, धार, आलीराजपुर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में बारिश हो सकती है।
दो चक्रवाती परिसंचरण से चार दिन तक बदला रहेगा मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से अगले चार दिनों तक ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, सागर, नर्मदापुरम, रीवा और जबलपुर संभाग के जिलों में मौसम का मिजाज बदला रह सकता है। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।
18 और 19 अक्टूबर को नीमच, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सीधी, मऊगंज, सिंगरौली, सिवनी और बालाघाट में बारिश होने का अनुमान है। हालांकि, 20 अक्टूबर से मौसम प्रणाली कमजोर पड़ने लगेगी। इसके बाद प्रदेश में तेज बारिश की संभावना कम हो जाएगी।
उज्जैन और चंबल संभाग के जिलों में पहले भी हुई बारिश
इससे पहले गुरुवार को चंबल और उज्जैन संभाग के पांच जिलों—श्योपुर, भिंड, मुरैना, नीमच और मंदसौर में बारिश दर्ज की गई थी। शुक्रवार को भी कई इलाकों में मौसम बदला रहा। बारिश के बीच प्रदेश के कुछ जिलों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।
अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री सेल्सियस रहा। छिंदवाड़ा में 17.4 डिग्री, इंदौर में 17.6 डिग्री, कटनी के करौंदी में 18 डिग्री और बैतूल में 18.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इससे रात और सुबह के समय ठंडक महसूस होने लगी है।
3 अक्टूबर को विदा हो चुका है मानसून
मध्य प्रदेश से 3 अक्टूबर को मानसून की विदाई हो गई थी, लेकिन मौसम प्रणालियों की सक्रियता के कारण प्रदेश में एक बार फिर बारिश होने लगी है। पिछले एक सप्ताह से पूर्वी हिस्से के जिलों में भी आंधी और बारिश का असर देखने को मिल रहा है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता है। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप नजर आ रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के साथ धूप निकलने लगी थी, लेकिन अब कई जिलों में बारिश हो रही है और रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिनों तक सक्रिय रहा।
प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत कम बारिश
जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच का 95.9 प्रतिशत है। इस तरह प्रदेश में औसत के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम बारिश दर्ज की गई।
क्षेत्रवार आंकड़ों में पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।
इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
प्रदेश के 25 जिलों में मानसूनी बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो गया है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।
दूसरी ओर, 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।
इस तरह प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का वितरण असमान रहा। अब मानसून की विदाई के बाद भी सक्रिय मौसमी प्रणालियों के चलते अगले कुछ दिनों तक कई जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है।
