
दमोह, 13 अक्टूबर। मध्य प्रदेश के दमोह में मंगलवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा पहुंची। यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आयोजित सभा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। यहां पंडित शास्त्री ने सप्त संकल्पों के माध्यम से सनातन समाज से एकजुटता का आह्वान किया। हालांकि, भारी भीड़ के बीच मंच तक पहुंचने की होड़ के चलते कई बार अव्यवस्थाएं भी देखने को मिलीं।
हटा से दमोह तक हुआ भव्य स्वागत
सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा ने 12 अक्टूबर को दमोह जिले में प्रवेश किया था। यात्रा के दौरान हटा नगर में रात्रि विश्राम किया गया, जहां पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया और दिव्य दरबार लगाया। मंगलवार सुबह यात्रा हटा से रवाना होकर पटेरा, हिंडोरिया और समन्ना होते हुए दमोह पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत किया।

सप्त संकल्पों से दिया सामाजिक एकता का संदेश
दमोह के पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सनातन समाज की एकता पर जोर दिया। उन्होंने भगवान रामानंदाचार्य के संदेश “जात-पात पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि को होई” का उल्लेख करते हुए सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट रहने का संदेश दिया।
इस दौरान उन्होंने युवतियों को संबोधित करते हुए कहा, “दुर्गा बनना, काली बनना, पर कभी ना बुर्के वाली बनना।” उनके इस बयान ने भी सभा के दौरान ध्यान आकर्षित किया।

भारी भीड़ के बीच मंच पर अव्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन पर सवाल
सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण मंच के आसपास भीड़ बढ़ती रही। बाबा के निकट पहुंचने और मंच पर जाने की होड़ के बीच कई बार व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को मशक्कत करनी पड़ी।
इस घटनाक्रम ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े किए। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच यह सुनिश्चित करना आयोजकों और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहा कि श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित बनी रहे और किसी अप्रिय घटना की आशंका को रोका जा सके।
जनसमूह के बीच एकता का संदेश, व्यवस्थाओं पर भी चर्चा
दमोह में सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा के दौरान उमड़ी भीड़ ने आयोजन को व्यापक जनभागीदारी वाला स्वरूप दिया। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता का संदेश दिया, वहीं मंच पर बार-बार पैदा हुई अव्यवस्थाओं ने आयोजन की तैयारियों और भीड़ नियंत्रण के इंतजामों पर चर्चा को जन्म दिया।
बड़े धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ उनकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजनों में प्रभावी भीड़ प्रबंधन, प्रवेश-निकास की समुचित व्यवस्था और सुरक्षा कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
