भोपाल । भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित पांच दिवसीय अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव 2026 का दूसरा दिन आज उत्साह और पारंपरिक रंगों के बीच मनाया जाएगा। मंगलवार से शुरू हुए इस आयोजन में गरबा प्रेमियों के बीच खास उत्साह देखने को मिल रहा है। गुजराती लोकगीतों की धुन पर गरबा डांडिया और तीन ताली के जरिए प्रतिभागी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। रंग-बिरंगे परिधान रोशनी से सजा पंडाल और पारंपरिक संगीत इस आयोजन को खास बनाने की तैयारी में हैं। नवरात्र के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव लोगों को धार्मिक आस्था के साथ भारतीय लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर दे रहा है।
महोत्सव की तैयारियों को लेकर पहले से ही व्यापक स्तर पर अभ्यास किया गया है। पहली ग्राउंड रिहर्सल में चार हजार से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान गुजराती पारंपरिक गीतों की धुन और प्रशिक्षकों की काउंटिंग के साथ प्रतिभागियों ने गरबा डांडिया और तीन ताली का अभ्यास किया। सामूहिक नृत्य के दौरान तालमेल बनाए रखने और निर्धारित स्टेप्स को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया। सोमवार को दूसरी ग्राउंड रिहर्सल भी आयोजित की गई थी ताकि मुख्य आयोजन के दौरान प्रतिभागी पूरे उत्साह और बेहतर तालमेल के साथ प्रस्तुति दे सकें।
इस बार महोत्सव में पारंपरिक गुजराती वेशभूषा के साथ अलग-अलग राज्यों की पोशाकों और विशेष थीम का आकर्षण भी देखने को मिल सकता है। पिछले आयोजनों में राजस्थानी परिधान महाकुंभ और श्रीनाथ जैसी थीम के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता दिखाई थी। इस बार भी प्रतिभागियों की वेशभूषा और पंडाल की सजावट उत्सव में चार चांद लगाने की तैयारी में है। पारंपरिक आभूषणों और रंगीन परिधानों के साथ गरबा करने वाले प्रतिभागियों के बीच उत्सव का माहौल और आकर्षक बनेगा।
आयोजन में बढ़ती भागीदारी को देखते हुए गरबा सर्किल का आकार भी बढ़ाया गया है। पहले इसका आकार 100 फीट था जिसे बढ़ाकर 110 फीट कर दिया गया है। इससे प्रतिभागियों को सामूहिक नृत्य के दौरान अधिक जगह मिल सकेगी। बड़े गरबा सर्किल में एक साथ बड़ी संख्या में प्रतिभागियों के नृत्य करने से आयोजन की भव्यता बढ़ने की उम्मीद है। गरबा की पारंपरिक लय और डांडिया की खनक के बीच पूरा मैदान उत्सव के रंग में रंगा नजर आएगा।
अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव में माता अम्बे की पूजा-अर्चना और महाआरती भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पारंपरिक नृत्य का यह संगम श्रद्धालुओं और गरबा प्रेमियों को आकर्षित करता है। रोशनी से सजे पंडाल में माता की आराधना के बाद गरबा और डांडिया का उत्साह देखने को मिलेगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में शहर के लोगों को परिवार और दोस्तों के साथ उत्सव का आनंद लेने तथा गुजराती संस्कृति की परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
महोत्सव में प्रवेश के लिए पास अनिवार्य रखा गया है। आयोजकों के अनुसार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पास प्राप्त किए जा सकते हैं। एक कपल पास पर दो लोगों को प्रवेश मिलेगा और इनमें एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य है। पास अभिव्यक्ति मैनेजमेंट द्वारा निर्धारित दुकानों से खरीदे जा सकते हैं। इसके अलावा भेल दशहरा मैदान स्थित गरबा ग्राउंड पर बनाए गए दो ऑफलाइन स्टॉल से भी पास लेने की सुविधा है। ऑनलाइन पास के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था भी की गई है। आयोजकों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से ही पास खरीदें ताकि प्रवेश के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
