बैठक में विशेषज्ञ अतुल खरे ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत प्रस्तावित व्यवस्थाओं की जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण के अनुसार यदि कोई व्यक्ति या संस्था खुले में कचरा फेंकती है या उसे जलाती है तो नगर निगम जुर्माना लगाएगा। इसके अलावा 100 या उससे अधिक लोगों के किसी भी सार्वजनिक आयोजन के लिए आयोजकों को कम से कम तीन दिन पहले निगम को सूचना देना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की जा सकेगी।
नए नियमों को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने कई सवाल उठाए। वार्ड-16 के पार्षद मोहम्मद सरवर ने कहा कि पॉलीथिन पर प्रतिबंध के बावजूद शहर में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जब तक मौजूदा नियमों का कड़ाई से पालन नहीं होगा, तब तक नए नियम भी केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे। उन्होंने सफाई व्यवस्था की खामियों का जिक्र करते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में नालियों से निकाला गया कचरा दिनों तक सड़क किनारे पड़ा रहता है क्योंकि उसे उठाने की व्यवस्था नहीं होती।
कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने निगम के संसाधनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नए नियम लागू करने से पहले यह देखना होगा कि निगम के पास पर्याप्त बजट, वाहन और कर्मचारी हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि कई वार्डों में कचरा वाहन खराब होने पर कई दिनों तक कचरा नहीं उठ पाता। कर्मचारियों की कमी के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है।
वहीं भाजपा पार्षदों ने भी सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की। भाजपा पार्षद विलास राव घाड़गे ने कहा कि हर वर्ष कर्मचारियों की संख्या कम होती जा रही है जबकि शहर में कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने नए नियमों का समर्थन करते हुए कहा कि इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से सख्ती से शुल्क एवं दंड वसूला जाना चाहिए।
बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद देवांशु कंसाना ने अपने वार्ड में गिरे पेड़ को हटाने में छह दिन लगने का उदाहरण देते हुए निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इस पर भाजपा पार्षदों ने आपत्ति जताई और कहा कि उनके क्षेत्रों में ऐसी समस्याएं नहीं हैं। इस मुद्दे पर परिषद में कुछ देर तक तीखी नोकझोंक भी हुई।
महापौर मालती राय ने चर्चा के दौरान कहा कि सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति वही पार्षद बेहतर जानते हैं जो नियमित रूप से अपने वार्डों का निरीक्षण करते हैं। उन्होंने रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था और जमीनी निगरानी की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
नए नियमों के तहत अब बड़ी इमारतों, स्कूलों, कॉलेजों और व्यावसायिक परिसरों को अपने स्तर पर गीले कचरे के निपटान की व्यवस्था करनी होगी। बड़े आयोजनों और प्रदर्शनियों के लिए ऑनलाइन पंजीयन भी अनिवार्य किया जाएगा। नगर निगम 30 जून तक इन नियमों को लागू करने की तैयारी कर रहा है। निगम का दावा है कि नई व्यवस्था से शहर में कचरे के परिवहन में लगभग 25 प्रतिशत तक कमी आएगी और कचरा प्रबंधन अधिक वैज्ञानिक एवं जवाबदेह बन सकेगा।
बैठक के दौरान एक दिलचस्प दृश्य भी देखने को मिला। भीषण गर्मी और परिषद हॉल में एयर कंडीशनर बंद होने के कारण कई पार्षद एजेंडे की प्रतियों से खुद को हवा करते नजर आए। यह दृश्य बैठक की चर्चा के साथ-साथ लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना रहा।
