इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 1 मई से 30 मई तक व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण सत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं को कुल 11 अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। उनका कहना था कि भाजपा की कार्यप्रणाली में नियमित प्रशिक्षण का विशेष महत्व है और इसी के माध्यम से कार्यकर्ताओं को विचारधारा संगठनात्मक कौशल और जनसंपर्क के तरीकों में दक्ष बनाया जाता है।
बैठक में डॉ. मोहन यादव सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए। इसके अलावा राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश प्रदेश प्रभारी डॉ महेन्द्र सिंह और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी प्रशिक्षण महाअभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे महत्वपूर्ण घोषणा प्रदेश कार्यसमिति को लेकर सामने आई। हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट संकेत दिए कि नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची जल्द जारी की जाएगी। यह कार्यसमिति आगामी समय में पार्टी के संगठनात्मक फैसलों और राजनीतिक रणनीति का केंद्र होगी। कार्यसमिति के गठन को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्सुकता भी बढ़ गई है क्योंकि इसमें शामिल नाम भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
खास बात यह है कि नई कार्यसमिति के गठन के बाद उसकी पहली बैठक ऐतिहासिक स्थल ओरछा में आयोजित की जाएगी। यह बैठक भगवान राम के दरबार में आयोजित करने की योजना है जिससे इसे सांस्कृतिक और वैचारिक महत्व भी दिया जा रहा है। पार्टी इसे केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक और प्रेरणादायक शुरुआत के रूप में देख रही है।
निगम मंडलों में नियुक्तियों को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई बार सभी की सहमति एक नाम पर नहीं बन पाती इसलिए प्रक्रिया में समय लगता है लेकिन सरकार और संगठन योग्य और काबिल लोगों को ही जिम्मेदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध और मतभेद हर युग में रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो भाजपा ने मध्यप्रदेश में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। मई का महीना पार्टी के लिए बेहद अहम रहने वाला है जिसमें प्रशिक्षण अभियान के साथ-साथ नई कार्यसमिति का गठन और उसकी पहली बैठक राजनीतिक रूप से कई संकेत देने वाली होगी।
