छतरपुर। जिले के चंदला क्षेत्र में सरकारी निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 366.94 लाख रुपए की लागत से निर्माणाधीन चंदला-बंसिया-गौहानी मार्ग पर उमरी नाले में बनाया जा रहा पुल पहली ही बारिश के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त होकर बह गया। पुल का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद करीब आधा दर्जन से अधिक गांवों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की कथित तौर पर अनदेखी की गई। उनका दावा है कि निर्माण में पर्याप्त सरिया नहीं लगाया गया और पिलरों में मिट्टी भरकर उन्हें खड़ा किया गया। ग्रामीणों के मुताबिक पुल कुछ सरियों और रिंगों के सहारे तैयार किया जा रहा था, जो पानी के पहले ही तेज बहाव को नहीं झेल सका।
पहली बारिश में ही खुल गई निर्माण की पोल
जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग संभाग छतरपुर द्वारा बंसिया रोड से जुड़गुड़ू-विहारगंज मार्ग का निर्माण स्वीकृत किया गया है। करीब 3.40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की स्वीकृत लागत 366.94 लाख रुपए बताई गई है। निर्माण का ठेका मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन एजेंसी को दिया गया है।
करीब छह माह से सड़क निर्माण का काम चल रहा है। इसी मार्ग पर जुड़गुड़ू-विहारगंज के बीच अटईया बाबा के पास उमरी नाले में पुल का निर्माण कराया जा रहा था। बारिश के दौरान नाले में पानी का बहाव बढ़ा और निर्माणाधीन पुल का एक बड़ा हिस्सा तेज बहाव में टूटकर बह गया।
मलबा हटाने को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल का हिस्सा बहने के बाद ठेकेदार द्वारा रातों-रात मलबा हटाने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों ने मौके की स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है। उनका कहना है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता और पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारणों की जांच नहीं की।
यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं, तो सवाल यह भी उठता है कि किसी निर्माणाधीन सरकारी पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद विभागीय जांच से पहले मलबा हटाने की अनुमति किस स्तर से मिली?
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
जुड़गुड़ू, बिहारगंज, बल्दूपुरा सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण में पर्याप्त मात्रा में सरिया और अन्य निर्माण सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया। उनका आरोप है कि पिलरों को मजबूत आधार देने के बजाय मिट्टी से काम चलाया गया।
ग्रामीण रामप्रकाश पाल, रामप्रकाश पटेल, रमेश पटेल, मनोज विश्वकर्मा, मंगल सिंह पटेल, पवन पटेल, बल्दा अनुरागी, राजकरन पटेल, कल्लू राय, पप्पू पटेल, प्रेमनारायण पटेल, धीरज विश्वकर्मा, अभिषेक पटेल, अर्जुन पटेल, रामआसरे पटेल और दिनेश पाल सहित करीब एक सैकड़ा लोगों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
पुल टूटा तो गांवों का संपर्क हुआ प्रभावित
निर्माणाधीन पुल का हिस्सा बहने से जुड़गुड़ू, बल्दूपुरवा, बिहारगंज, गोविंदपुर, मकारी, सिमरिया और गुलौरा सहित आसपास के गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीणों के मुताबिक स्कूली बच्चों को पानी के बीच से होकर आवागमन करना पड़ रहा है, जबकि मरीजों को खाट पर रखकर नाला पार कराने की नौबत आ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि नाले के दूसरी ओर करीब तीन किलोमीटर तक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है। आरोप है कि निर्माण के दौरान ठेकेदार द्वारा कोई वैकल्पिक रास्ता भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया। पुल का हिस्सा बहने के बाद निर्माण कार्य में लगी लेबर और सामग्री भी मौके से हटाए जाने की बात ग्रामीणों ने कही है।
भूमि पूजन के एक साल के भीतर ही सवालों के घेरे में निर्माण
इस मार्ग का करीब एक वर्ष पहले स्थानीय विधायक एवं राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार द्वारा भूमि पूजन किया गया था। शिलान्यास पट्टिका के अनुसार लोक निर्माण विभाग संभाग छतरपुर द्वारा बंसिया रोड से जुड़गुड़ू-विहारगंज मार्ग का निर्माण कराया जा रहा है। मार्ग की लंबाई 3.40 किलोमीटर और स्वीकृत लागत 366.94 लाख रुपए है।
अब सवाल यह है कि जिस निर्माण पर सरकार के लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं, वह पहली ही बारिश के तेज बहाव में कैसे बह गया? क्या निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हुआ था? क्या विभागीय अधिकारियों ने निर्माण के दौरान नियमित गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी की? और यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं, तो जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?
जांच हुई तो सामने आ सकती है निर्माण की हकीकत
पुल के क्षतिग्रस्त होने की घटना ने लोक निर्माण विभाग की निगरानी व्यवस्था और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण में इस्तेमाल सामग्री के नमूने लिए जाएं और यदि गुणवत्ता में गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
फिलहाल ग्रामीणों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुल के बहने की वास्तविक वजह निर्माण की गुणवत्ता थी, डिजाइन संबंधी कमी थी या असामान्य जल प्रवाह।
