नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक अहम पहल सामने आई है। अब प्रदेश में सर्वाइकल कैंसर की जांच पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक डीएनए किट के जरिए की जाएगी। इसका उद्देश्य जांच के दौरान होने वाली झिझक को खत्म करना और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को स्क्रीनिंग से जोड़ना है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी कर रहा है। योजना के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की जांच डीएनए आधारित किट से की जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट जुलाई से शुरू हो सकता है, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तार दिया जाएगा।
नई तकनीक में महिलाओं को खुद सैंपल देने की सुविधा मिलेगी। किट में दिए गए स्वैब और विशेष कंटेनर की मदद से नमूना लेकर उसे लैब में भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया से शारीरिक जांच की जरूरत कम होगी, जिससे महिलाएं बिना झिझक जांच करवा सकेंगी। इससे स्क्रीनिंग का दायरा भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
इस जांच के जरिए सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण मानव पेपिलोमा वायरस (HPV) की पहचान की जाएगी। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो आगे की जांच और उपचार तुरंत शुरू किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर पहचान होने से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 30 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है। अब तक पारंपरिक जांच पद्धतियां खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बाधा बनती थीं, लेकिन डीएनए आधारित तकनीक से शुरुआती स्तर पर संक्रमण पकड़ना आसान हो जाएगा।
साथ ही, प्रदेश टीकाकरण के मामले में भी आगे है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीन के तहत मध्य प्रदेश में करीब 92% किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है। आंकड़ों के अनुसार, हर साल प्रदेश में 4 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं, जबकि करीब 2100 महिलाओं की इस बीमारी से मौत हो जाती है।
कुल मिलाकर, यह नई पहल न केवल महिलाओं की झिझक को खत्म करेगी, बल्कि समय पर पहचान और इलाज के जरिए हजारों जिंदगियां बचाने में भी मददगार साबित हो सकती है।
