यात्रा शुरू करने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। उन्होंने सबसे पहले चिंतामन गणेश मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद नृसिंह घाट के पास बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। महाकाल मंदिर में दर्शन करने के बाद यात्रा आगे बढ़ी।
यात्रा के पहले दिन लगभग तीन हजार लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई। आगे के पड़ावों पर प्रतिदिन एक हजार से 1,500 लोगों के जुड़ने का अनुमान है। इसमें साधु-संतों, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, विधायकों और महिलाओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। यात्रा के माध्यम से मंदिरों में आने वाले चढ़ावे और धार्मिक स्थलों के संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की मांग उठाई जा रही है।
दिग्विजय सिंह ने यात्रा के दौरान भोजन, नाश्ते, चाय और ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी बात कही है। अलग-अलग पड़ावों पर सहयोग करने वाले लोग इन व्यवस्थाओं में मदद करेंगे। उनका कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि यात्रा के दौरान भोजन और भंडारों का खर्च कौन उठा रहा है। यात्रा का उद्देश्य धार्मिक स्थलों से जुड़ी व्यवस्थाओं और चढ़ावे के उपयोग में स्पष्टता की मांग को सामने लाना है।
यात्रा का पहला पड़ाव उज्जैन के कानीपुरा में रखा गया है। शहर में यात्रा पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, कमरी मार्ग चौराहा, टंकी चौराहा, मिर्जा नईम बेग मार्ग, तेलीवाड़ा चौराहा, कंठाल चौराहा, निजातपुरा और कोयला फाटक सहित कई इलाकों से होकर गुजरेगी। इसके बाद नगर निगम के सामने, गाड़ी अड्डा चौराहा, दरगाह मंडी और कानीपुरा रोड से आगे बढ़ेगी। तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी में रात के भोजन और विश्राम की व्यवस्था रखी गई है।
कानीपुरा से आगे यात्रा सिंदुरिया, तराना और कनासिया होते हुए शाजापुर जिले की ओर जाएगी। मध्य प्रदेश में इसका प्रस्तावित मार्ग सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर और चंदेरी से होकर गुजरेगा। इसके बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी। वहां तालबेहट, जेरोन और ओरछा के बाद चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचने की योजना है। यात्रा का अंतिम पड़ाव राम मंदिर होगा।
यात्रा के साथ एक विशेष रथ भी चल रहा है। इसमें भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रथ में गंगा, यमुना, शिप्रा, कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे गए हैं। इस रथ का निर्माण भरत पोरवाल के निर्देशन में महावीर जैन और सतीश शर्मा ने किया है।
करीब 70 दिनों में यात्रा पूरी करने के लिए दिग्विजय सिंह ने पैदल चलने की तैयारी पहले से की थी। इसके लिए वह प्रतिदिन लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे। अब उज्जैन से शुरू हुई यह यात्रा निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए अयोध्या में समाप्त होगी।
