रिटायरमेंट से पहले खंगाला जाएगा पूरा सर्विस रिकॉर्ड
राज्य सरकार अब उन कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराएगी, जो कार्यभारित, आकस्मिकता निधि से वेतन प्राप्त करने वाले या अन्य श्रेणियों में कार्यरत हैं। जांच के दौरान कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर वर्तमान स्थिति तक पूरे सेवाकाल के रिकॉर्ड, वेतन निर्धारण, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और अन्य वित्तीय लाभों का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी कर्मचारी को नियमों के विरुद्ध लाभ दिए जाने या वेतन निर्धारण में त्रुटि मिलने की पुष्टि होती है, तो संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पांच विभागों पर रहेगा विशेष फोकस
वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह विशेष अभियान मुख्य रूप से पांच बड़े विभागों में चलाया जाएगा। इनमें लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग शामिल हैं। इन विभागों में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनके वेतन निर्धारण और सेवा संबंधी प्रकरण वर्षों से लंबित बताए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन मामलों के समाधान से कर्मचारियों को राहत मिलने के साथ-साथ वित्तीय अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी।
लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देश
वित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे वेतन निर्धारण, वेतनमान स्वीकृति, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण करें।
आदेश में कहा गया है कि अनेक कर्मचारी लंबे समय से अपने वित्तीय मामलों के निराकरण का इंतजार कर रहे हैं। कई मामलों में वेतनमान और सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर विवाद भी बने हुए हैं, जिससे कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए विभागवार विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है ताकि लंबित प्रकरणों का समयबद्ध समाधान किया जा सके।
सेवा पुस्तिकाओं की होगी विशेष जांच
वित्त विभाग ने आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) तथा विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं का परीक्षण करें और उनमें दर्ज त्रुटियों को तत्काल सुधारें। यदि किसी मामले में पूर्व अनुमोदन या अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया की आवश्यकता हो तो उसे भी समय रहते पूरा करने को कहा गया है। विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सेवा अभिलेख अद्यतन और नियमों के अनुरूप हों।
छह महीने में पूरा करना होगा अभियान
सरकार ने इस विशेष अभियान के लिए छह माह की समयसीमा निर्धारित की है। इस अवधि के भीतर सेवा अभिलेखों, वेतन निर्धारण और अन्य वित्तीय लाभों से जुड़े लंबित मामलों का निराकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही विभागों को अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से वित्त विभाग को भेजनी होगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
कर्मचारियों और सरकार दोनों पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान से एक ओर कर्मचारियों के लंबित वित्तीय मामलों का समाधान होगा, वहीं दूसरी ओर वेतन निर्धारण में हुई संभावित अनियमितताओं का भी पता चल सकेगा। सेवानिवृत्त और सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा के बाद जहां पात्र कर्मचारियों को उनका वैध लाभ मिलेगा, वहीं नियमों के विरुद्ध हुए भुगतान या स्वीकृतियों की स्थिति में सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव होगी।
