मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश एक अद्भुत धरती है जहां हर युग में दिव्य सानिध्य की अनुभूति होती रही है। उन्होंने कहा कि वनवास काल में भगवान श्रीराम के आगमन से लेकर श्रीकृष्ण के शिक्षा ग्रहण तक इस भूमि का इतिहास दिव्यता से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर का एकात्म धाम जगद्गुरु आदि शंकराचार्य की महान परंपरा का जीवंत प्रतीक है और यह स्थान अद्वैत वेदांत की शाश्वत शिक्षाओं को विश्व पटल पर स्थापित करने की क्षमता रखता है।
कार्यक्रम के दौरान अद्वैत लोक और अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने यज्ञ में आहुतियां देकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। यह आयोजन आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वैशाख शुक्ल पंचमी के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता भिड़े सहित कई संत और विद्वान उपस्थित रहे जिन्होंने अद्वैत दर्शन और आधुनिक युवा पीढ़ी के संबंधों पर विचार साझा किए।
आयोजन के अंतर्गत द्वैत लोक संग्रहालय के निर्माण की भी योजना है जो दूसरे चरण में विकसित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने बड़ी राशि की स्वीकृति प्रदान की है। इस मंच पर अद्वैत वेदांत की प्रासंगिकता पर विशेष विमर्श भी शुरू हुआ जिसमें संतों ने आत्मा ब्रह्म और भगवान की एकता पर प्रकाश डाला। शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि यह तीनों तत्व वास्तव में एक ही सत्य के विभिन्न रूप हैं और इन्हीं के समागम से भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होता है।
पांच दिवसीय एकात्म पर्व के दौरान ओंकारेश्वर में विभिन्न धार्मिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बन रहा है बल्कि यह अद्वैत दर्शन को आधुनिक समाज से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी माना जा रहा है। यहां आने वाले लोग भारतीय संस्कृति की गहराई और उसकी एकात्म दृष्टि का अनुभव कर रहे हैं।
इस आयोजन के माध्यम से सरकार और संत परंपरा मिलकर भारतीय दर्शन की गहराई को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। ओंकारेश्वर में बढ़ती श्रद्धालुओं की उपस्थिति से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है और पर्यटन को नई पहचान मिल रही है। यहां आने वाले युवा और विद्यार्थी अद्वैत वेदांत के मूल सिद्धांतों को समझकर जीवन में संतुलन और सकारात्मकता की प्रेरणा ले रहे हैं। यह आयोजन आने वाले समय में मध्यप्रदेश को आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
