बैठक में हर्ष गोयनका ने जबलपुर में निवेश कर विद्युत पारेषण क्षेत्र में काम करने की इच्छा व्यक्त की। इस दौरान मध्यप्रदेश की औद्योगिक अवसंरचना, भौगोलिक स्थिति, कुशल कार्यबल और राज्य सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों के आधार पर नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। जबलपुर में ट्रांसमिशन क्षेत्र से जुड़े निवेश को लेकर आगे की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
आरपीजी समूह ने मध्यप्रदेश में टायर निर्माण इकाई स्थापित करने की संभावना पर भी चर्चा की। इसके लिए राज्य की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति और कच्चे माल की उपलब्धता को महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा गया। बातचीत में रतलाम, सागर और जबलपुर को संभावित निवेश स्थलों के तौर पर रखा गया। इन स्थानों पर उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद आगे की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश को लेकर भी बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई। आरपीजी समूह की टीम ने संभावित निवेश स्थलों का दौरा कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन करने की इच्छा जताई। इस क्रम में उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क में उपलब्ध प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के इस्तेमाल की संभावना पर भी विचार किया गया। तैयार बुनियादी ढांचे के जरिए समूह को आईटी क्षेत्र में अपनी गतिविधियां शुरू करने का अवसर मिल सकता है।
बैठक में संभावित परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि, आवश्यक अनुमतियों, निवेश प्रोत्साहनों और एकल-खिड़की व्यवस्था के जरिए सहयोग उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। प्राथमिकता वाले निवेश प्रस्तावों और संभावित स्थानों की पहचान कर आगे की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया गया। इससे प्रस्तावित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं पर विचार किया गया।
आरपीजी समूह अवसंरचना, मोबिलिटी, टायर, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा समाधान और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम करता है। समूह के प्रमुख व्यवसायों में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। समूह की वैश्विक उपस्थिति छह महाद्वीपों के 135 से अधिक देशों में बताई गई है।
आरपीजी समूह का मध्यप्रदेश से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। वर्ष 1951 से आरपीजी ट्रांसमिशन लिमिटेड के माध्यम से समूह की राज्य में उपस्थिति रही है। इसकी प्रमुख कंपनी केईसी इंटरनेशनल ने नीमच अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली सहित मध्यप्रदेश की विद्युत पारेषण अवसंरचना के विकास में योगदान दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और हर्ष गोयनका के बीच हुई बैठक में ट्रांसमिशन, टायर निर्माण और आईटी क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
