परदेशीपुरा की गली नंबर 3 में सड़क के नीचे बने चैंबर के आसपास जमीन खोखली होने की जानकारी सामने आने के बाद निगम अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। शुरुआती तौर पर अधिकारियों को आशंका है कि पुराना ड्रेनेज चैंबर कमजोर होकर ढह गया होगा जिसके कारण सड़क के नीचे खाली जगह बनी और ऊपर का हिस्सा दबाव नहीं झेल सका। यहां ड्रेनेज लाइन पुरानी बताई जा रही है जबकि चैंबर का ढक्कन अपेक्षाकृत नया दिखाई दे रहा है। हालांकि सड़क के नीचे इतना बड़ा खोखलापन किस वजह से बना यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
स्थानीय जानकारी के मुताबिक करीब एक साल पहले भी इसी स्थान पर सड़क धंस गई थी। उस समय चैंबर की मरम्मत कराने के बाद सड़क के नीचे मिट्टी का भराव किया गया था। अब एक बार फिर उसी जगह सड़क धंसने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पिछली मरम्मत के बाद समस्या पूरी तरह दूर क्यों नहीं हुई। क्या ड्रेनेज लाइन में लीकेज जारी रहा या फिर सड़क के नीचे मिट्टी का भराव पर्याप्त तरीके से नहीं किया गया था। इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है।
तकनीकी जानकारों के अनुसार पुरानी भूमिगत ड्रेनेज लाइन में लीकेज होने पर पानी आसपास की मिट्टी को धीरे धीरे बहा सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर सड़क के नीचे खाली जगह बनती जाती है। ऊपर से सड़क पर लगातार वाहनों का दबाव पड़ता रहता है। जब जमीन का सहारा कमजोर हो जाता है तो कांक्रीट की परत टूटकर नीचे बैठ सकती है। इसी तरह किसी मरम्मत या निर्माण के बाद यदि मिट्टी का भराव ठीक तरीके से नहीं किया जाए तो भी समय के साथ जमीन बैठने की समस्या सामने आ सकती है।
परदेशीपुरा की घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इंदौर में पिछले कुछ महीनों के दौरान सड़क धंसने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। मेघदूत गार्डन गोराकुंड गाड़ी अड्डा नासिया रोड और पंढरीनाथ क्षेत्र में भी सड़क धंसने के मामले सामने आए हैं। शहर में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क चैंबर निर्माण कार्य और सड़क के नीचे किए जाने वाले भराव की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल नगर निगम की टीम मौके की स्थिति का परीक्षण कर रही है। सड़क के नीचे बने खोखले हिस्से की वजह स्पष्ट होने के बाद जरूरी सुधार कार्य किया जाएगा। लेकिन एक ही जगह पर एक साल के भीतर दूसरी बार सड़क धंसने की घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या पिछली मरम्मत के दौरान समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय केवल सतही सुधार किया गया था।
