आधे खर्च में मिलेगा इलाज, हजारों दंपतियों को राहत
इस सेंटर की सबसे बड़ी खासियत इसकी किफायती लागत है। अभी प्रदेश में करीब 10 हजार दंपती हर साल निजी क्लीनिकों में IVF कराते हैं, जहां एक साइकिल का खर्च 1.5 लाख से 3 लाख रुपए तक पहुंच जाता है। वहीं AIIMS Bhopal में यही इलाज करीब 50 हजार से 75 हजार रुपए में उपलब्ध होगा।
दिल्ली और रायपुर के बाद यह देश का तीसरा और मध्य प्रदेश का पहला सरकारी IVF सेंटर होगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए लगभग 20 करोड़ रुपए का बजट भी मंजूर किया है, जिससे अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
हाईटेक सुविधाएं और एडवांस तकनीक
इस सेंटर में IVF, ICSI, IUI, टेस्ट ट्यूब बेबी जैसी आधुनिक प्रजनन तकनीकों की पूरी सुविधा होगी। साथ ही एम्ब्रियो फ्रीजिंग, हाई-एंड इन्क्यूबेटर और एडवांस लैब भी तैयार की गई है। खास बात यह है कि यहां डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए डिजिटल स्किल लैब बनाई गई है, जिसमें एआई आधारित सिम्युलेटर के जरिए भ्रूण ट्रांसफर और अन्य प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग दी जाएगी।
घटती प्रजनन दर से बढ़ी IVF की मांग
मध्य प्रदेश में पिछले 10 सालों में फर्टिलिटी रेट में करीब 12.8% की गिरावट दर्ज की गई है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण कई दंपतियों को माता-पिता बनने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि IVF जैसी तकनीकों की मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि IVF की सफलता महिला की उम्र पर निर्भर करती है, इसलिए समय पर इलाज शुरू करना बेहद जरूरी होता है।
नियम सख्त, लेकिन उम्मीद बरकरार
IVF को लेकर सरकार ने कई सख्त नियम भी लागू किए हैं। महिला की अधिकतम उम्र 50 साल और पुरुष की 55 साल तय की गई है। एक बार में केवल दो भ्रूण ही ट्रांसफर किए जा सकते हैं और हर प्रक्रिया की रिपोर्ट संबंधित समितियों को भेजना अनिवार्य है।
इंतजार खत्म होते ही बदलेगी तस्वीर
अगर जल्द ही लाइसेंस मिल जाता है, तो यह सेंटर हजारों दंपतियों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित होगा। कम खर्च में बेहतर इलाज की सुविधा मिलने से न सिर्फ आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि कई परिवारों का सपना भी पूरा हो सकेगा
