प्रदर्शनकारियों ने कल्पना मिश्रा को न्याय दो और CBI जांच लागू करो जैसे नारे लगाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। मंच का कहना है कि कल्पना ने मौत से पहले इलाज और मदद के लिए गुहार लगाई थी लेकिन उनकी आवाज पर समय रहते उचित ध्यान नहीं दिया गया। मंच ने इस पूरे प्रकरण को केवल एक परिवार से जुड़ा मामला नहीं बल्कि विंध्य क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बताया।
मंच अध्यक्ष दिलीप तिवारी ने कहा कि यदि सरकार जल्द मामले की CBI जांच कराने की दिशा में कदम नहीं उठाती है तो विंध्य क्षेत्र के लोग भोपाल में एकजुट होकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग भी की। धरने में अनीश शर्मा भूपेन्द्र मिश्रा अभिषेक तिवारी प्रवीण शर्मा सुरजन संदीप विश्वकर्मा देवराज राणा अंकित रघुवंशी और धीरेंद्र राणा सहित कई लोग मौजूद रहे।
प्रदर्शन के दौरान मामले में चल रही मजिस्ट्रियल जांच को लेकर भी सवाल उठाए गए। मंच का तर्क है कि जिन प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं उन्हीं से जुड़ी व्यवस्था के स्तर पर होने वाली जांच से निष्पक्षता को लेकर लोगों के मन में संदेह बना रह सकता है। इसी वजह से मंच ने मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग रखी है।
विंध्य नागरिक अधिकार मंच ने रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए। मंच का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं और इलाज नहीं मिल पा रहा है जबकि कुछ डॉक्टर निजी नर्सिंग होम में अधिक ध्यान दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी अस्पतालों से मरीजों को कथित तौर पर निजी अस्पतालों की ओर भेजने और इलाज के नाम पर वसूली के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।
मंच ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में रिकॉर्ड और दस्तावेजों के रखरखाव को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में सरकारी रिकॉर्ड में ऐसी विसंगतियां सामने आ रही हैं जिनमें मृत व्यक्ति का इलाज दर्ज होने और जीवित व्यक्ति को मृत दिखाए जाने जैसी स्थिति बताई गई है। हालांकि ये मंच की ओर से लगाए गए आरोप हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं हुई है।
मामले की शुरुआत 25 अगस्त को हुई थी जब रीवा जिले के हटवा गांव की 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा डिलीवरी के लिए गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंची थीं। परिवार के अनुसार यह उनकी पहली डिलीवरी थी और गर्भावस्था के दौरान उनकी हालत सामान्य थी। 26 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे उनका सी-सेक्शन हुआ। बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद कल्पना और नवजात दोनों की मौत हो गई।
मौत से पहले का एक वीडियो सामने आने के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया। वीडियो में कल्पना अस्पताल में मदद और वहां से ले जाने की गुहार लगाती नजर आई थीं। इसके बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। मामले में दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया जबकि अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाकर डॉ. प्रियंक शर्मा को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद जच्चा-बच्चा की मौत की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए।
अब विंध्य नागरिक अधिकार मंच इस जांच से संतुष्ट नहीं है और CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कह रहा है। मंच का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। आने वाले दिनों में सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है इस पर सभी की नजर रहेगी।
