लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, कंडवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त कर अलग-अलग टीमों ने सुबह करीब छह बजे एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई शुरू की।
कार्रवाई इतनी गोपनीय रखी गई थी कि संयुक्त संचालक और उनके परिवार को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। सुबह-सुबह बड़ी संख्या में लोकायुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों के पहुंचने से संबंधित इलाकों में चर्चा का माहौल बन गया। जांच के दौरान अधिकारियों को कई ऐसे निवेश और व्यावसायिक प्रतिष्ठान मिले, जिनकी भव्यता ने टीम को भी चौंका दिया।
सबसे अधिक चर्चा एक दो मंजिला आधुनिक जिम सेंटर को लेकर रही। जांच में सामने आया कि कंडवाल से जुड़ा यह फिटनेस सेंटर अत्याधुनिक सुविधाओं और महंगी मशीनों से सुसज्जित है। बताया जा रहा है कि यह शहर के प्रमुख निजी जिमों में शामिल है। इसके अलावा एक बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर की भी जांच की गई, जहां रोजमर्रा के उपभोक्ता सामानों का बड़े पैमाने पर कारोबार संचालित किया जा रहा था।
लोकायुक्त टीम को अब तक पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के आसपास 12 प्लॉट, इंदौर में एक व्यावसायिक प्लॉट और अन्य अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही एक बैंक लॉकर की जानकारी भी सामने आई है, जिसकी जांच और तलाशी की प्रक्रिया आगे की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि संपत्ति का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है क्योंकि दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत पड़ताल जारी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि अपने सेवाकाल के दौरान कंडवाल झाबुआ, रतलाम, नीमच, रीवा, शहडोल, उज्जैन, देवास और इंदौर सहित कई जिलों में पदस्थ रहे हैं। लोकायुक्त अब उनकी आय के स्रोतों, निवेश के तरीकों और संपत्ति अर्जित करने की प्रक्रिया की विस्तृत जांच कर रही है।
इस कार्रवाई को प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद संपत्ति के वास्तविक मूल्यांकन, निवेश के स्रोत और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अन्य तथ्यों को भी सार्वजनिक किया जाएगा। फिलहाल बरामद दस्तावेजों और संपत्तियों का सत्यापन किया जा रहा है तथा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
