राजधानी भोपाल में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹918.50 से बढ़कर ₹947.50 हो गई है। वहीं इंदौर में अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए ₹970 चुकाने होंगे। जबलपुर में इसकी कीमत ₹919 पहुंच गई है। सबसे अधिक असर ग्वालियर और उज्जैन के उपभोक्ताओं पर पड़ा है, जहां सिलेंडर की कीमत क्रमशः ₹1025 और ₹1001 हो गई है। इसके साथ ही दोनों शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर का दाम हजार रुपए के आंकड़े को पार कर गया है।
पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार है जब घरेलू LPG सिलेंडर महंगा हुआ है। इससे पहले मार्च में सिलेंडर के दामों में ₹60 की वृद्धि की गई थी। ताजा बढ़ोतरी को जोड़कर देखा जाए तो तीन महीने के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर करीब ₹110 महंगा हो चुका है। लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि रसोई गैस रोजमर्रा की जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में लगातार वृद्धि और घरेलू बिक्री पर होने वाले नुकसान के कारण कीमतें बढ़ाना आवश्यक हो गया था। सूत्रों के अनुसार सरकारी तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक घरेलू सिलेंडर पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। हालांकि नई वृद्धि के बाद भी कंपनियों को होने वाले नुकसान की केवल आंशिक भरपाई ही हो पाएगी।
गैस सिलेंडर के अलावा छोटे उपभोक्ताओं के लिए उपयोग होने वाले 5 किलोग्राम LPG सिलेंडर की कीमतों में भी ₹11 की बढ़ोतरी की गई है। नई दरों के बाद इसकी कीमत ₹821.50 तक पहुंच गई है। इससे छोटे परिवारों और अस्थायी श्रमिक वर्ग पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ऐसे समय हुई है जब हाल के सप्ताहों में पेट्रोल, डीजल और CNG के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुल मिलाकर ₹7.50 प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं, जबकि CNG लगभग ₹6 प्रति किलोग्राम महंगी हुई है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर भी दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि LPG सिलेंडर की कीमत तय करने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की दरें, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात और परिवहन लागत, बॉटलिंग एवं वितरण खर्च, सरकार की सब्सिडी नीति तथा कर व्यवस्था जैसी कई महत्वपूर्ण बातें शामिल होती हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
महंगाई के इस दौर में घरेलू गैस सिलेंडर की नई कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और सरकार की नीतियां तय करेंगी कि उपभोक्ताओं को आगे राहत मिलेगी या कीमतों का दबाव और बढ़ेगा।
