सबसे पहले बात पन्ना की जहां जल संसाधन विभाग के एक कार्यपालन यंत्री का रिश्वत को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। दरअसल विभाग के दो कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए थे। इसी मामले को लेकर जब मीडियाकर्मियों ने कार्यपालन यंत्री से सवाल किया और पूछा कि क्या उनका भी कोई प्रतिशत तय है तो उन्होंने ऐसा जवाब दिया जिसने सभी को हैरान कर दिया। अधिकारी ने कहा कि उनका कोई प्रतिशत तय नहीं है लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपनी खुशी से पैसा दे जाता है तो वे उसे रख लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी में आने के बाद से उनका यही तरीका रहा है। अधिकारी ने एक तरफ पैसे लेना गलत बताया लेकिन दूसरी तरफ खुशी से मिलने वाले पैसे स्वीकार करने की बात भी कबूल कर ली। उनका यह बयान सामने आने के बाद विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया।
दूसरी घटना सीहोर की है जहां एक लाड़ली बहना अपनी घरेलू परेशानी लेकर मंत्री करण सिंह वर्मा के पास पहुंची थी। महिला ने शिकायत की कि उसका पति शराब पीकर उसके साथ मारपीट करता है। उसने इलाके में शराब का ठेका बंद कराने की मांग की ताकि उसके परिवार में होने वाली परेशानी कम हो सके। हालांकि मंत्री ने शराब का ठेका बंद कराने के बजाय महिला को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी से कहा कि महिला के पति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेजने की कार्रवाई की जाए। शराब की बिक्री को लेकर मंत्री ने कहा कि लोग तो शराब पीते ही हैं। इस जवाब के बाद महिला की मांग और प्रशासनिक समाधान को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
इंदौर में भाजपा के शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा भी एक अलग वजह से सुर्खियों में आ गए। उन्हें लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचना था लेकिन देरी होने के कारण उन्होंने रास्ते में एक बाइक सवार से लिफ्ट ले ली। जल्दबाजी में बाइक पर बैठते समय उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गिरते-गिरते बच गए। हालांकि उन्होंने खुद को संभाल लिया और कार्यक्रम में पहुंच गए। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हल्की-फुल्की चर्चा को जन्म दे दिया।
इसी कार्यक्रम के दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक नारों की जंग भी देखने को मिली। कांग्रेस के वोट चोर गद्दी छोड़ और मोदी तो जाएगा जैसे नारों के जवाब में भाजपा ने लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ अभियान शुरू किया है। शाजापुर जिले के कालापीपल से भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में कविता के जरिए विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने अपने वीडियो में कहा कि विरोधियों के विरोध के बावजूद मोदी कहीं नहीं जाएंगे। वहीं इंदौर में केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी कार्यक्रम के दौरान मोदी के समर्थन में नारा लगवाने की कोशिश की। उन्होंने मोदी तो कहकर जनता से नारा पूरा करने की अपेक्षा की लेकिन जब कोई आवाज नहीं आई तो उन्होंने खुद ही मोदी तो नहीं हटेगा कहकर बात पूरी कर दी।
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्राधिकरण के एक बड़े नेता और उनके मातहत नेता के बीच चल रही खींचतान भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि प्राधिकरण में एक नेता के करीबी बाबू को महत्वपूर्ण पद पर बैठाया गया था और दोनों मिलकर फैसले ले रहे थे। इससे नाराज दूसरे नेता ने शिकायत की और मामला सरकार तक पहुंच गया। इसके बाद संबंधित बाबू को पद से हटा दिया गया लेकिन उनकी जगह नियुक्त अधिकारी भी उसी नेता का करीबी बताया जा रहा है। अब शिकायत करने वाले नेता दोबारा राजधानी के चक्कर लगा रहे हैं। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही के भीतर चल रही खींचतान को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
