दरअसल 4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पांढुर्णा पहुंचे थे। दौरा पूरा करने के बाद जब मुख्यमंत्री वापस लौट रहे थे तब किसानों ने रास्ते में उनका काफिला रोक लिया। किसानों के हाथों में सूखी और मुरझाई हुई फसलें थीं। किसानों ने जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने के साथ कृषि कर्ज माफ करने की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी। अचानक सामने आई इस स्थिति के बाद मुख्यमंत्री अपनी गाड़ी से नीचे उतरे और किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री के काफिले को इस तरह रोके जाने की घटना को सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर माना गया। अब पांढुर्णा एसपी प्रकाश चंद्र परिहार के तबादले के बाद इसे उसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
गृह विभाग के आदेश के अनुसार प्रकाश सिंह परिहार को पांढुर्णा एसपी के पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय में एआईजी बनाया गया है। वहीं सेनानी दूसरी वाहिनी एसएएफ ग्वालियर में पदस्थ विदिता धनखड़ को पांढुर्णा का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। इसके अलावा 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी श्रुतकीर्ति सोमवंशी को वर्तमान जिम्मेदारी के साथ दूसरी वाहिनी एसएएफ ग्वालियर के सेनानी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
पांढुर्णा एसपी के तबादले के साथ ही प्रदेश में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की चर्चा भी तेज हो गई है। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में करीब 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए जा सकते हैं। इस सूची में कई जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी शामिल हो सकते हैं। सरकार की ओर से अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा के बाद यह बदलाव किए जाने की तैयारी है।
सूत्रों के मुताबिक कुछ पुलिस अधीक्षकों के नियमित रूप से कार्यालय नहीं जाने और कामकाज को लेकर शिकायतें भी सरकार तक पहुंची हैं। ऐसे अधिकारियों को कमजोर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की श्रेणी में रखकर जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप काम नहीं करने वाले कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर भी तबादले की गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है।
संभावित फेरबदल केवल कलेक्टर और एसपी स्तर तक सीमित नहीं रहने वाला है। प्रशासनिक बदलाव की सूची में एक या दो संभागायुक्तों के नाम भी शामिल हो सकते हैं। वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। यदि यह व्यापक प्रशासनिक फेरबदल होता है तो आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश के कई जिलों में प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था का चेहरा बदल सकता है।
