प्रस्तावित नियमों के अनुसार हर कोचिंग सेंटर को अपनी वेबसाइट बनाकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी। इसमें कोचिंग की फीस का पूरा विवरण शिक्षकों की योग्यता उपलब्ध सुविधाएं और शिकायत निवारण व्यवस्था शामिल होगी। संस्थान को यह भी बताना होगा कि वहां किन परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। इससे दाखिला लेने से पहले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को कोचिंग सेंटर की व्यवस्था और खर्च की जानकारी मिल सकेगी। फीस और सुविधाओं को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना इन प्रावधानों का प्रमुख उद्देश्य है।
पंजीयन व्यवस्था के तहत कोचिंग संचालकों को निर्धारित समय सीमा में आवेदन करना होगा। प्रारूप के मुताबिक संस्थानों को नियम लागू होने के बाद 90 दिनों के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा। पंजीयन की अवधि तीन साल निर्धारित की गई है जिसके बाद उसका नवीनीकरण कराना जरूरी होगा। पंजीयन किसी दूसरे व्यक्ति या संस्थान को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी कोचिंग सेंटर की एक से अधिक शाखाएं हैं तो हर शाखा को अलग कोचिंग सेंटर माना जाएगा। इससे प्रत्येक शाखा की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की अलग निगरानी की जा सकेगी।
विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोचिंग परिसरों में निर्धारित उपयुक्त स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी होगा। हालांकि निगरानी के नाम पर विद्यार्थियों की निजता से समझौता नहीं किया जा सकेगा। शौचालयों चेंजिंग रूम और परामर्श कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा संस्थानों को पर्याप्त बैठने की व्यवस्था स्वच्छ पेयजल साफ-सफाई प्राथमिक उपचार और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के इंतजाम करने होंगे। आगंतुकों का रिकॉर्ड रखने और सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया है।
शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। प्रारूप के अनुसार ट्यूटर बनने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है। संस्थानों को प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मचारियों और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए योग्य परामर्शदाताओं की व्यवस्था भी करनी होगी। विद्यार्थियों को परीक्षा और प्रतियोगिता के दबाव से निपटने में मदद देने के लिए मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग पर विशेष जोर दिया गया है। नियमित परामर्श सत्र आयोजित करने और अभिभावकों के साथ संवाद बनाए रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
नियमों में प्रवेश और पढ़ाई के दौरान धर्म मूलवंश जाति लिंग जन्मस्थान या अन्य आधारों पर किसी विद्यार्थी के साथ भेदभाव नहीं करने का प्रावधान है। इन आधारों पर विद्यार्थियों का अलग बैच बनाने पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए परिसर को दिव्यांग-अनुकूल बनाने और शिक्षकों को उनके प्रति संवेदनशील रखने पर जोर दिया गया है।
पंजीयन या नवीनीकरण का आवेदन अस्वीकार होने अथवा पंजीयन रद्द या निलंबित किए जाने की स्थिति में अपील का अधिकार भी दिया गया है। संबंधित आदेश की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील की जा सकेगी। प्रारूप में सुनवाई के बाद 45 दिनों के भीतर अपील का निपटारा करने का उल्लेख है।
इन प्रस्तावित नियमों से विद्यार्थियों और अभिभावकों को कोचिंग चुनने से पहले फीस शिक्षकों की योग्यता सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायतों के समाधान की औपचारिक व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी से ही यह स्पष्ट होगा कि कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता और विद्यार्थियों की सुरक्षा को कितना मजबूत बनाया जा सकेगा।
