जानकारी के मुताबिक परिजन रवि को इलाज के लिए सतना के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने एक किडनी में गंभीर समस्या बताते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। 4 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया जो करीब पांच घंटे तक चला। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान डॉक्टरों ने गंभीर लापरवाही बरती और जिस किडनी का इलाज होना था उसके साथ साथ दूसरी स्वस्थ किडनी में भी कट लगा दिया गया।
ऑपरेशन के बाद ही मरीज की हालत बिगड़ने लगी जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई। स्थिति को गंभीर होता देख अस्पताल प्रबंधन ने बिना समय गंवाए उसे रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। हालांकि परिजनों का कहना है कि यह रेफरल भी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश थी क्योंकि उस समय तक स्थिति काफी खराब हो चुकी थी।
रीवा पहुंचने के बाद जब डॉक्टरों ने जांच की तो मामला और भी चौंकाने वाला निकला। दूसरी किडनी पर गहरा कट पाया गया था जिसे कथित तौर पर धागे से बांध दिया गया था। इससे लगातार खून का रिसाव होता रहा और किडनी ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए इमरजेंसी में दूसरी किडनी को भी निकालना पड़ा लेकिन तब तक संक्रमण और आंतरिक क्षति इतनी बढ़ चुकी थी कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
लगातार बिगड़ती हालत के बीच आखिरकार युवक ने दम तोड़ दिया जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जैसे ही मौत की खबर परिजनों को मिली उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। इसके बाद कोलगवां थाना क्षेत्र में भी विरोध प्रदर्शन हुआ और परिजनों ने दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक चिकित्सकीय गलती नहीं बल्कि घोर लापरवाही का मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी हो जाती है ताकि भविष्य में किसी और को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की उम्मीद जताई जा रही है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पीड़ित परिवार को न्याय कब और कैसे मिल पाता है।
